परमेश्वर कौन है

 

सभी वस्तुओं का सृष्टिकर्ता।

उत्पति 1:1 पद कहता है “आदि मे परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की रचना की। परमेश्वर सृष्टिकर्ता है। जिसने हर एक वस्तु की सृष्टि की है। शब्द रचना का अर्थ है कुछ नही से कुछ की रचना करना। बाइबल में इब्रानियों 11:3 पद कहता है- विश्वास ही से हम जान जाते है कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुर्इ है पर यह नही कि जो कुछ देखने मे आता है, वह देखी हुर्इ वस्तुओं से बना हो। यह कार्य परमेश्वर के वचन द्वारा  हुआ जिसने सभी वस्तुओं की रचना कुछ नही से की है।

सृष्टि का संचालन और जो कुछ सृष्टि मे है उसको देखने के द्वारा और प्रकृति के अदभुत सिदान्तो के द्वारा  परमेश्वर लोगों को यह विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है।

विकासवाद या सृष्टिवाद।

बाइबल की शिक्षाओं के अतिरिक्त यहां तक कि अगर हम अपनी समझ के अनुसार सोचें तो हम पाऐगें कि निश्चित तौर पर परमेश्वर है और वह ही हर वस्तु का सृजनहार है। अगर बदंर विकसित होकर मनुष्य बने होते तो आज भी चिडियाघर मे इतने बंदर है वो अब तक मनुष्य मे क्यों विकसित नही हुए। क्यों अब तक उनकी वही बनावट है हजारों वर्षों पूर्व थी। जैसा कि बाइबल मे लिखा है केवल मनुष्य के पास ही विवेक और आत्मा है क्योंकि मनुष्य ही परमेश्वर के स्वरूप मे बना है और इसलिए इसके अलावा यहां तक कि वे विभिन्न महाद्विपों मे रहते है सभी मनुष्य की दो आखें एक नाक ओर एक मुह है और सभी अगों का अपना अपना एक निश्चित स्थान है। विभिन्न जातियों के होने के बावजूद भी यह तथ्य कि, सभी मनुष्यों की आकृति एक जैसी है हमे बताता है कि यदि हम वशांवली मे पीछे की ओर जाएं तो हम एक ही पूर्वज पर पहुंचेगे। अत: हम यह देख सकते है कि बाइबल के अनुसार परमेश्वर ने मनुष्य की रचना अपने ही स्वरूप  मे की तो यह ज्यादा बुद्धिमानी है।

इसके अतिरिक्त चाहे विज्ञान और सभ्यता कितनी भी विकसित क्यों न हो गया हों, मानव संवय जीवन नही बना सकता है। कुछ की रचना कुछ नही से करना यह वह विषेश कार्य है जो केवल परमेश्वर से संबधित है। विज्ञान के द्वारा मनुष्य सिर्फ परमेश्वर द्वारा बनार्इ गर्इ चीजों का उपयोग करके दूसरी चीजों की खोज कर सकता है। दूसरी चीजों को विकसित कर सकता है और दूसरी चीजें बना सकता है ।

उत्पति की पुस्तक जो कि बाइबल मे सम्मिलित 66 पुस्तकों मे से एक है। परमेश्वर के सृष्टि के कार्य को विस्तार से बताती है। उत्पति 1:1 मे लिखा है आदि मे परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी का रचना की। और इस तथ्य पर कि परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है प्रकाश डालती है। उत्पति विस्तार से इस तथ्य को कि जगत और जो कुछ इस में है परमेश्वर ने अपनी बुद्धि के अनुसार सब की रचना की प्रकाश डालती है।

इस के विपरित डार्विन का सिद्धांत कहता है कि सब की उत्पति अपने आप से हुर्इ है। केवल वे जीव जो जीवन के संघर्ष मे सबसे उच्च थे जीवित रहें और यह भी कहा गया है कि मनुष्य की उत्पति वानर से हुर्इ है। और क्योंकि वे परमेश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नही रखते है उनका जीवन का उदेश्य संसारिक खुशियों के अनुसार जीवन व्यतीत करना है। यह मनुष्य आधारित विचार है।

जब से डार्विन ने अपना सिद्धांत प्रस्तुत किया तब से बहुत से लोगों का मानना है कि यह ही सत्य है। परन्तु आज ऐसे प्रमाण है कि बहुत से जीवों की उत्पति डार्विन के सिद्धांत से बहुत जटिल और वैज्ञानिक है। और डार्विन ने सवयं ही उसे नकारा है। यह इसलिए हुआ कि डार्विन का सिद्धांत जो कहता है कि मनुष्य की उत्पति सवयं ही हुर्इ है यह सिद्धांत थर्मोडाइनैमिक्स के 1 और 2 सिद्धांत और भूगोंल के अनुसार सही नही है। इस के अतिरिक्त वे लोग जो डार्विन के सिद्धांत को मानते है। और कहते है जांवा मैन जो कि 50,000 साल पहले था वही पहला मनुष्य था जिसकी हडडीयां पार्इ गर्इ है।

परन्तु यह तथ्य जर्मन के वैज्ञानिकों के द्वारा रद्द कर दिया गया। और यह प्रमाणित किया गया कि निएनड्रल मैन एक ऐसा मनु”य था जिसके कुभ था और  उसमे विटामिन डी की कमी पार्इ जाती है।

इसलिए डार्विन का सिद्धांत न तो परमेश्वर कें अनुसार सही है और न ही वैज्ञानिकों के प्रमाणों के अनुसार सही है। इस सब के बावजूद डार्विन ने उत्पति को नही स्वीकार कीया और अपने दियें गए सिद्धांत को सही प्रमाणित करने के लिए कोशिश करता रहा। इसलिए बाइबल कहती है कि वे जिन्होने परमेश्वर के सत्य को झूठ से बदल दिया और सृष्टि की वस्तुओं की आराधना की, न की सृजनहार की । रोमियों 1:25-28 मे लिखा है। इस संसार मे कुछ भी एसा नही जो किसी के द्वारा न बनाया गया हो। बच्चों के खिलौनो से लेकर उड़ते हवार्इ जहाज तक, हर चीज का अस्तित्व है क्योंकि हर एक चीज कीसी न कीसी के द्वारा बनार्इ गर्इ है।

यहां तक की सड़को पर खड़ी इमारतें भी उनके मालिकों द्वारा अपने अनुसार बनार्इ गर्इ हैं और ये इमारतें मजदूरों द्वारा मालिक के कहें अनुसार बनार्इ हुर्इ है। इसी प्रकार पृथ्वी और स्वर्ग मे जो कुछ भी है वह परमेश्वर ने अपनी बुद्धि के अनुसार बनाया है।

इसलिए रामियों 1:25 कहता है। परमेश्वर ही सृष्टिकर्ता है। और बाइबल मे बहुत से ऐसे पद है जो यह प्रमाणित करतें है कि परमेश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी की रचना अपने वचनों के द्वारा की। इब्रानियों 11:3 पद कहता है। विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुर्इ है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुर्इ वस्तुओं से बना हो।

इसके अतिरिक्त 1 यूहन्ना 1:3 कहता है जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है।

परमेश्वर द्वारा सभी प्राणीयों की एक सी रचना।

इसका प्रमाण की परमेश्वर सृ”टीकर्ता है न केवल बाइबल में है परन्तु सृष्टि मे बहुत सी ऐसी चीजें है जो इस बात को प्रमाणित करती है। यहां पर उतर , दक्षिण, पूरव , पश्चिम, गर्मी , सर्दी , बसंत और बहुत सी चीजें है। पृथ्वी का चक्कर लगाना और परिक्रमा करना , समुद्र मे लहरों का उठना और गिरना, हवा का चलना और बादल और इसके अतिरिक्त सृष्टि की सभी वस्तुऐं परमेश्वर के आदेशनुसार नियमित रूप से नियत्रण में है। तो हम कैसे कह सकतें है कि ये सब चीजें सवयं से बनी है। न कि परमेश्वर के द्वारा? और यह भी कि इस संसार मे जितने पशु, पक्षी और मच्छलियां सभी की दों आखें एक नाक और एक मुह और दो कान है। और सभी अपने अपने स्थान पर है। और यह देखकर हम पता लगा सकतें है कि सृष्टिकर्ता एक ही है।

एक उदाहरण लें, संसार में बहुत से लोग हैं, बहुत सी जातियां तथा समूह जिनकी भाषाऐँ वेशभूषा तथा उनकी त्वचा के अलग अलग रंग हैं, परन्तु कुछ बातें सब में एक समान हैं। सब लोगों तथा सब देशों की जातियों में सबकी दो आँखें, दो कान, एक नाक तथा एक मुँह है। सबका स्थान निश्चित है। नाक चेहरे के मध्य में है, आँखे ऊपर के भाग में हैं। मुँह नाक के नीचे तथा कान सिर के दोनों ओर हैं।

न केवल मनुष्यों में समान अंग तथा उनकी समान स्थिति है। यह जानवरों, हवा के पक्षियों, कीड़ों-मकोड़ों तथा समुद्र की मछलियों में भी है। प्रत्येक जाति-प्रजाति के अनुसार सूक्ष्म अन्तर है परन्तु मूल रूप से उनकी रचना समान है। इसके अलावा उनके पाचन अंग तथा जनन अंग भी आपस में समान हैं। समानता का कारण यह है कि एक ही परमेश्वर ने उनको बनाया है।

संसार के लोग डार्विन-वाद के सिदान्त पर जोर देते हैं तथा परमेश्वर के द्वारा सृष्टि-रचना को नकारते हैं। जैसा कि वे कहते हैं कि मनुष्य विकासवाद से उत्पन्न हुआ है। यदि एसा होता तो हम सब की रचना एक समान नहीं होती। हम बहुत से रूपों तथा रचनाओं में विकसित हो गये होते।

यदि हमारा एक ही सृष्टिकर्ता नहीं होता,तो मनुष्यों तथा जानवरों का अपनी जाति तथा प्रजाति के अनुसार न तो समान रचना होती औन न ही एक सा आकार होता, क्योंकि यदि बहुत से सृष्टिकर्ता होते तो वें अपनी-अपनी पसन्द के अनुसार अपने प्राणियों की रचना तथा कार्य-विधि बनाते। परन्तु यह देखकर कि लगभग सभी वस्तुओं की एक जैसी रचना तथा कार्य-विधि है, हम निश्चित रूप से समझ सकते हैं कि उनकी रचना एक ही परमेश्वर के द्वारा की गयी है।

इसलिए रोमियों 1:19 – 20 कहता है। इसलिये कि परमेश्वर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है। 20 क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरूत्तर हैं।

इसलिए कोर्इ भी यह बहाना नही बना सकता कि उसने इसलिए विश्वास नही किया क्योंकि वह पमरेश्वर को नही जानता था।

फिर कैसे परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की।

उत्पत्ति 2:7 कहता है। और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनो में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।

परमेश्वर ने मनुष्य की रचना स्मपूर्ण रूप मे की और  उसके आंतरिक अगों को भी बनाया, श्वास लेने के लिए तथा पाचन के लिए। परन्तु क्योंकि मनुष्य इन्ही अगों के साथ नही चल सकता है इसलिए पमरेश्वर ने आदम के नथनों मे जीवन का श्वास फूकां ताकि वह जीवीत प्राणि बन जाएं। इस कथन को आसनी समझने के लिए हम एक जलती हुर्इ ट्यूब लाइट के बारे मे सोंच सकते है। ट्युब लाइट जलें इसके लिए हमे  उसमे बल्ब लगाना पड़ता है। और फिर ट्यूब लाइट को बिलजी से स्रोत से जोड़ना पड़ता है। परन्तु अभी भी वह ट्यूब लाइट नही जलेंगी। हमे स्वीच को चालू करना पडे़गां कि उसमे से बिजली बहें और वह ट्यूब जल जाएं।

मनुष्य एक जीवित प्राणी बना क्योंकि परमेश्वर ने उसके नथनों मे जीवन का श्वास फूंक दिया। फिर भी मनुष्य जो एक प्राणी है उसने कम्पयूटर बनाया और विज्ञान के जरीये पूरे विश्व की छानबीन की । तो यह परमेश्वर के लिए कितना आसान है कि वह संसार और मनुष्य की रचना करें और सब कुछ नियत्रिंत करें। परमेश्वर जो सृष्टिकर्ता है वह सर्वशक्तिमान है। और वह कुछ भी कर सकता है। परमेश्वर जो प्रेमी परमेश्वर है उसने सब कुछ की रचना की है। और ऐसा पर्यावरण बनाया जिसमे मनु”य रह सकता है। उसने हवा बनार्इ कि हम श्वास लें सकें और और भी जीव बनाएं जिन पर मनुष्य राज कर सकें। फिर परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की और उसके नथनों मे जीवन की श्वास फूंक दिया । ताकि मनुष्य श्वास ले सकें और जीवन के साथ चल सकें।

विकासवाद के सिदान्त का भ्रम

क्या आप सोचते हैं कि ये सब कुछ एकदम अचानक से हो गया जैसा कि कुछ वैज्ञानिक कहते हैं। आप सामान्य सोच का उपयोग क्यों नहीं करते? यदि आप घड़ी को खोल कर देखें तो, बहुत से बारीक पुर्जे बहुत ही सही ढंग से उसमें लगाये गये हैं जिससे कि घड़ी चल सके। आइये अब मान लें कि कोर्इ आपको इस घड़ी को दिखा रहा है तथा कह रहा है कि किसी ने इस घड़ी को नहीं बनाया, इसके पुर्जे ज्वालामुखी के विस्पफोट में से निकले तथा अपने आप आपस में जुड़ गये और कार्य करने लगे। क्या आप विश्वास करेंगे? यदि आप मूर्ख नहीं हैं, तो कभी विश्वास नही करेंगे।

इसीलिये, यह कहना कि सब वस्तुएं विकास से बनी है, घड़ी के बारे में उपयुक्त बात कहने की तुलना मे बहुत ज्यादा मूर्खता है। ब्रह्माण्ड की गति जो घड़ी की तुलना में ज्यादा निश्चित नियमानुसार तथा सही है, तो यह ब्रह्माण्ड बिग बैंग विस्फोट से कैसे बन सकता है। इतना बड़ा ब्रह्माण्ड स्वयं से कैसे एक-निश्चित क्रम से गति कर सकता है? यह इसलिये सम्भव है क्योंकि ब्रह्माण्ड तथा जो कुछ उसमें है वह परमेश्वर की बुद्धि से नियोजित किये गये तथा बने और उसकी बुधि से चलाये जाते हैं। सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने इन सबको अपनी सामर्थ से बनाया तथा चलाता है। चूँकि हमारे पास ये प्रमाण हैं इसलिये अन्तिम न्याय के समय कोर्इ भी कीसी प्रकार का बहाना नहीं बना सकता।

इतने स्पष्ट प्रमाणों को देखने के बाद भी कोर्इ कैसे विश्वास नहीं कर सकता?

इसीलिये क्योंकि वे केवल उसका ही विश्वास करते हैं जिसको वो देख सकते, छू सकते तथा अपने ज्ञान तथा विचारों से समझ सकते हैं।

तब उनके विचार तथा ज्ञान कहाँ से आये? क्या वे उनके पास जन्म से थे?

उनका ज्ञान तथा समझ उन लोगों से प्राप्त है जो परमेश्वर में विश्वास नहीं करते। वे इस बात को नहीं स्वीकारते है कि एक अदृश्य जीवित परमेश्वर है। वे बाइबल के चिन्ह तथा आश्चर्यों को नहीं मानते। परन्तु बाइबल के सारे वचन अपने-आप में सत्य हैं। यह सत्य है कि परमेश्वर ने स्वर्ग तथा पृथ्वी की रचना की और चिन्ह, आश्चर्यकर्म तथा सामथ्र्ाी कार्य वास्तव में हुए हैं। ये बातें केवल सृष्टि-कर्ता परमेश्वर के द्वारा ही हो सकती हैं। वे बाइबल को नकारते हैं क्योंकि यह, उनके सीमित ज्ञान तथा विचारों से समझने योग्य तथा विश्वास करने योग्य नहीं है। परन्तु बाइबल में लिखित चिन्ह तथा आश्चर्यकर्म सत्य हैं।

यहूना 4:48 में यीशु ने कहा जब तक तुम लोग चिन्ह तथा आश्चर्यकर्म न देखोगे विश्वास न करोगे। मनुष्यों के विचार तथा रूपरेखा उस समय टूट जाते हैं जब वे मनुष्य की सीमा से परे चिन्ह तथा अद्भुत कार्य देखते हैं। जब वे असम्भव बात को परमेश्वर की शक्ति के द्वारा सम्भव होता देखते हैं तब वो परमेश्वर को स्वीकार करते हैं।

इसलिये, परमेश्वर ने बाइबल में अपनी सामर्थ के बहुत से कार्यों तथा चमत्कारों के द्वारा हमें दर्शाया है कि वह है। मूसा ने परमेश्वर की सामर्थ को दस विपत्तियों के द्वारा फिरौन तथा उसकी म़िस्री प्रजा को दिखाया। एलियाह ने स्वर्ग से आग गिराकर तथा साढ़े तीन वर्ष के बाद वर्षा गिराकर परमेश्वर की सामर्थ को दिखाया। चिन्ह तथा आश्चर्य-कर्मों के द्वारा यीशु ने अपने आपको परमेश्वर का पुत्र सिध किया। पौलुस प्रेरित ने बीमारों को अच्छा किया, दुष्टात्माओं को निकाला तथा मुर्दे को भी यीशु मसीह के नाम से जीवित किया।

जब लोग उन बातों को देखते हैं जो केवल सृष्टिकर्ता परमेश्वर के द्वारा ही हो सकती हैं, तो अविश्वासी भी सृष्टिकर्ता परमेश्वर को स्वीकार करते हैं। वे सुसमाचार तथा उद्धारकर्ता यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं।

आज भी जब यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर के दासो के द्वारा प्रार्थना की जाती है तो, परिणाम स्वरूप दुष्ट आत्माऐं लोगो के जीवनो को छोड़ कर चली जाती हैं। बहरे सुनने लगते है, गुगें बोलने लगते हैं और अन्धे देखने लगते है। परमेश्वर की सामर्थ के चिन्ह तथा अद्भुत कार्यों के प्रदर्शन के आज भी ठोस प्रमाण हमारी कलिसीया मे उपलब्ध है।

तरह तरह की बीमारियां यीशु मसीह के नाम से ठीक हो जाती है जैसे कि, एडस, कैसर, रक्त का कैसर, टीबी, डाउन सिन्डृाम, पोलियो, गठिया,लकवे एव लगड़े अपनी व्हील चेयर से उठ कर खडे़ हो जाते है और चलने लगते है। और हर प्रकार की बामारियां यीशु मसीह के नाम से ठीक हो जाती है।

इन सब बीमारियों के डाक्टर के द्वारा सिद् कीये गये प्रमाण हमारी कलिसीया मे उपलब्ध हैं। जिसमे ये प्रमाणित किया गया है कि ये बीमारियां डाक्टर की योग्यता से बहार थी लेकिन जब रेवरंड डाक्टर जेरॉक ली के द्वारा यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना की गर्इ तो सभी बीमारियां ठीक हो गर्इ। इन सब की अधिक जानकारी हमारी क्रूस का सदेंश किताब में उपलब्ध है।

परमेश्वर आप सब को आशिष दें।

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