परमेश्वर के सामर्थ्य के साथ, सुसमाचार का प्रचार करना आसान है।

जोशुआ सोहतुन (शिलोंग, मेघालय)

मेरी माँ एक मसीही के प्रार्थना द्वारा हृदय रोग से चंगार्इ प्राप्त करने के बाद मसीही बन गर्इ। उसकी चंगार्इ की घटना ने परिवार के सभी सदस्यों को मसीही होने के लिए प्रेरित किया किन्तु मैंने चार वर्ष बाद प्रभु को अपनाया।

हिन्दी मानमिन समाचार और दिल्ली मानमिन मिशन सेन्टर से एक फोन वार्त्ता के द्वारा सन् 1999 में एक दिन, मेरे घर में आराधना सेवा हो रही थी। मैंने उसमें भाग नहीं लिया था, मगर बगल वाले कमरे में था। मैंने उनकी स्तुति बन्दना को पसन्द किया और ध्यान से उनको सुन रहा था। सेवा के दौरान, वक्ता ने यशायाह में से बाइबल पद को पढ़ा। यह यशायाह 49:15 था जो कहता है, ‘‘क्या यह हो सकता है कि कोर्इ माता अपने दूधपीते बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।’’ ये जो पद है जब मैं नौ वर्ष का था उस समय कूड़ा कचरा बिनने का काम करता था। उस समय एक व्यक्ति मेरे पास आया और कहा क्या तुम हिन्दी पढ़ सकते हो। उस व्यक्ति ने मुझे एक छोटा सा कागज दिया जिसमें यशायाह का यही पद लिखा था जिसे मैंने सम्भालकर रखा था और कभी कभी उसे पढ़ लिया करता था। मेरे मन में हमेशा एक प्रश्न उठता रहता था कि कौन ऐसा कह सकता है। जब उस पास्टर ने इस वचन को पढ़ा तब मैंने कहा यह तो परमेश्वर का वचन कहता है। मैंने कहा, प्रभु आप सच्चे खुदा हैं तो मेरे जीवन को बदल दें। अन्तत: मैंने प्रभु को अपनाया और बीते जीवन जो मदीरा सेवन और असंजत रहन सहन से भरी थी उसके लिए पश्चताप किया। मैं अपने पूर्व जीवनशैली को दरकिनार किया। मैं परमेश्वर के वचन के अनुसार जीने लगा, प्रतिदिन प्रार्थना करता था और प्रभु के प्रेम और आशीष को अपने जीवन में खोजने लगा।

मर्इ 2009 में, मै आसाम के गुवाहटी स्थित ओएम बुक शॉप में गया। उस बुक शॉप में रखे हिन्दी मानमिन न्यूज पढ़कर मैं बहुत अनुग्रहित हुआ। मैंने उस समाचार पत्र में लिखे फोन नम्बर से दिल्ली मानमिन मिशन सेन्टर से सम्पर्क किया। वहां स्थित भार्इ राजू ने मेरे प्रश्नों का उत्तर दिया और लगातार मानमिन न्यूज मुझे भेजने लगे। उन्होंने मुझे एक डीवीडी जिसका शीर्षक ‘‘परमेश्वर का सामर्थ्य’’ है भी भेजा।

‘‘परमेश्वर का सामर्थ्य’’ डीवीडी और रेव. डा. जैरॉक ली द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘दी मैसेज ऑफ दी क्रॉस’’ और ‘‘दी मैजर ऑफ दी फेथ’’ ने मेरे दिल को छू लिया

डीवीडी देखते हुए जिसमें डा. ली के प्रार्थना के द्वारा प्रदर्शित परमेश्वर के सामर्थ्यशाली कार्यों को दिखाया गया है, मैं बहुत आचम्भित था यहां तक कि मुझे बिजली के झटके जैसा कुछ अनुभव हुआ था। मैं पवित्र आत्मा से परिपूर्ण था और परमेश्वर के महान सामथ्र्य को दुसरों तक फैलाने के लिए और पहले पहल इसे अनुभव करने से उत्साहित था।

जुलार्इ 2009 में, मैंने दिल्ली मानमिन मिशन सेन्टर को डा. जैरॉक ली के पुस्तक भेजने के लिए अनुरोध किया। मैंने सात पुस्तकों को पढ़ा जिसमें ‘दी मैसेज ऑफ दी क्रॉस’, ‘दी मेजर ऑफ दी फैथ’, ‘हैवन 1 एवं 2’, ‘हैल’ और ‘अवेकन इस्राएल’ इत्यादी शामिल है। विशेषरूप से, मैंने ‘दी मैसेज ऑफ दी क्रॉस’ को पसन्द किया जो उद्धार के मार्ग और क्रूस के प्रावधान का उल्लेख करता है और ‘‘दी मैजर ऑफ दी फैथ,’’ पढ़नेवाले को परमेश्वर के सदृश बनने का छोटा रास्ता दिखाता है। इन पुस्तकों में पहले कभी न सुने अद्भुत सन्देश समावेशित हैं।

पवित्र सुसमाचार और परमेश्वर के सामर्थ्य को न केवल भारत में बल्कि नेपाल और भूटान में प्रचार करना/फैलाना।

मैंने दिसम्बर 22, 2009 को एक केबल ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन जिसका कवरेज समूचे शिलोंग में है उनसे मिला। मैंने उन्हें ‘‘परमेश्वर का सामर्थ्य -2’’ डीवीडी दिया और हर कोशिश की कि इसका प्रसारण इस ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन से हो और यहां तक अपना पैसा भी इसके लिए खर्च किया।

अपनी कार में एक डीवीडी प्लेयर और टीवी मॉनिटर लेकर, मैंने ‘‘परमेश्वर का सामर्थ्य -2’’ कलीसियाओं और शहर के विभिन्न स्थानों में दिखाया है। अनेकों लोग यीशु मसीह के क्रूस के सन्देश द्वारा प्रभावित हुए हैं। मैंने मुआन का मीठा पानी को भी जो डा. ली के प्रार्थना द्वारा समुद्र के खारे पानी से मीठा पानी में परिवर्तित हुआ है लोगों में बांटा है। जिस किसी ने भी इसे विश्वास के साथ उपयोग किया है वह चंगार्इ प्राप्त कर मसीही को अपनाया है।

मेरे घर में मानमिन मिनिस्ट्री के कामकाज करने के लिए एक कमरा है। मेरे पास इस कमरे में मानमिन समाचार, डा. ली की पुस्तकें और मुआन का मीठा पानी है। अगर किसी को इन चीजों की आवश्यकता हो तो मैं उन्हें देता हूं।

दिसम्बर 23, 2009 से, मैंने 120 डीवीडी नेपाल के विभिन्न कलीसियाओं में भेजी है। मैंने भूटान में अपनी पत्नी के गाँव में सुसमाचार का प्रचार किया है। मैं खासी लोगों की भाषा सीख रहा हूं जो उत्तरपूर्वी भारत, बांगलादेश और आसाम के पहाड़ी क्षेत्रों में बोली जाती है ताकि उनके बीच प्रचार कर सकूं। इनकी जनसंख्या लगभग 1,360,000 के आसपास है। इन क्षेत्रों के लिए प्रचार सामग्री उन्हीं की भाषा में अनुवादित हो रहा है। पवित्र सुसमाचार के प्रचार के लिए मैं अपनी पूरी शक्ति लगा दूंगा जो मैंने एमआर्इएस (मानमिन इन्टरनैशनल सेमिनरी) से सीखा है।

लगभग 100 परिवारों ने आसाम, भारत में मसीहियत को अपनाया

एक बीस वर्षीय स्त्री सुनिता मिरधा जो आसाम के तेजपुरा गाँव में रहती है दुष्टात्मा से ग्रस्त थी। उसे उसके कमरे में ही रख कर परिवार के सदस्यों द्वारा उसकी देखभाल की जाती थी क्योंकि उसने अनेकों समस्यायें खड़ी की थी जैसे चीजें व सामानों को फेंकना। अनेकों पास्टरों ने उसके लिए प्रार्थना की थी पर उसमें कोर्इ परिवर्तन हुआ। उस समय, उसके पिता को मानमिन मिनिस्ट्री के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने डा. ली से प्रार्थना प्राप्त करना चाहा।

मैंने दिल्ली मानमिन मिशन सेन्टर के पास्टर जॉन को उनकी परेशानियों के बारे में अवगत कराया। पास्टर किम ने डा. ली से प्रार्थना निवेदन किया और उन्होंने उसके लिये शुक्रवार रात्री सेवा के दौरान प्रार्थना को किया। आश्चर्यजनक रूप से, दुष्टात्मा से छुटकारा पा कर अब वह सामान्य है।

परमेश्वर के ऐसे चमत्कारी कार्य को देखने के बाद, उसके परिवार के सदस्य और गाँव के लोगों ने मसीहियत को अपनाया। शुरूआत में केवल 20 परिवार परिवर्तित हुए परन्तु यह समाचार आस पास पड़ोसियों में फैलने के बाद लगभग 100 परिवारों ने मसीहियत को अपनाया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके पिता गाँव में एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके रिश्तेदार आस पास ही रहते हैं।

जोशुआ सोहतुन मानमिन समाचार पत्रिका बांटते हुऐ।

 

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