अध्याय 6-क्यों केवल यीशु मसीह ही उद्धारकर्ता हैं ?

अध्याय 6

“केवल यीशु मसीह ही उद्धारकर्ता हैं |”
1. समय के शुरू होने से पहले ही उद्धार का मार्ग छुपा हुआ था।
परमेश्वर आरम्भ से ही जानता था कि प्रथम मनुष्य आदम उनकी आज्ञा का उल्लंघन करेगा और इसी कारण बहुत सी आत्माएं मारी जाएगी और विनाश की ओर गिरेगीं । इसलिए आरम्भ से ही परमेश्वर ने मनुष्य के उद्धार का मार्ग तैयार किया यीशु मसीह के द्वारा । यह क्रूस का मार्ग है। परमेश्वर ने इसे गुप्त रखा क्योंकि यदि वह बता देते तो वे मनुष्यजाति को नही बचा पाते क्योंकि फिर शत्रु शैतान को मनुष्यजाति के उद्धार का रास्ता पहले ही पता चल जाता।
1 कुरिन्थियों 2:7- कहता है परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते।
जैसे कि हर देश के अपने कानून होते है आत्मिक क्षेत्र के भी अपने कानून है। परमेश्वर के बच्चों को पुनः प्राप्त करना जो कि शत्रु शैतान के बच्चे बन गए है, यह आत्मिक क्षेत्र के कानून के अनुरूप मे होना चहिए। इसलिए पमरेश्वर ने अपने स्वयं एकलौते पुत्र को इस पृथ्वी पर भेजा और कू्रसित होने दिया। मनुष्यजाति की छुड़ौती के लिए “भूमि की छुड़ौती के नियम के अनुसार“

2. भूमी के छूटकारे का नियम
लैव्यव्यवस्था 25:23 भूमि सदा के लिये तो बेची न जाए, क्योंकि भूमि मेरी है; और उस में तुम परदेशी और बाहरी होगे। लेकिन तुम अपने भाग के सारे देश में भूमि को छुड़ा लेने देना।। यदि तेरा कोई भाईबन्धु कंगाल होकर अपनी निज भूमि में से कुछ बेच डाले, तो उसके कुटुम्बियों में से जो सब से निकट हो वह आकर अपने भाईबन्धु के बेचे हुए भाग को छुड़ा ले।
भूमी के छूटकारे का नियम हमे बताता है कि यदि कोई अपनी भूमी बेच भी दे तो भी वह स्वयं या उसका कोई संबंधी आकर भूमि को छूड़ा सकता है। इसलिए जब लोग इस्राइल की भूमि बेचते है तब वह भूमि के बेचने , खरीदने और उसकी छूड़ौती की पूरी प्रक्रिया को रिकार्ड अर्थात लिखित रूप में रखते है। बंेचने वाला और खरीदनेवाला दोनो गवाहों के सामने उस पर मोहर लगाते है वे एक प्रतिलिपि को मंदिर के भंडारगृह मे अथवा खत्ते में  रखते है और दूसरी प्रतिलिपि को मंदिर के द्वार पर बिना मोहर लगाए ही रखते है। ताकि वे उस को किसी भी समय देख पाए। तो अपनी भूमि बेचने पर भी यदि कोई उसे दोबारा खरीदने की ताकत और योग्यता रखता है तो वह उसे किसी भी समय छूटकारे के नियम के अनुसार खरीद सकता है।
बिलकुल इसी तरह परमेश्वर और शत्रु शैतान के बीच में भूमि के छूटकारे का समझौता हुआ। और यह आदम के द्वारा पमरेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन करने के कारण हुआ। आदम ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया इसलिए उसे राज्य करने के सारे अधिकार वापस लौटाने पङे । (लूका 4:6) पर यह हमेशा के लिए बेचा नही गया। परन्तु एक दिन या किसी दिन वापस छुड़ाया गया।
परमेश्वर ने भूमि के छूटकारे और उद्धार के रास्ते को खोलने के लिए यीशु मसीह को तैयार किया( क्रूस के दर्द को सहने के द्वारा)। जो भी कोई प्रभू का नाम लेगा वह उद्धार पाएगा। (रोमियो10:13) और परमेश्वर के बच्चे होने के अधिकार को प्राप्त करेगा । (युहन्ना 1:12)
3. भूमि के छुटकारे की शर्त और यीशु मसीह।
लैव्यव्यवस्था 25:23-25 मे लिखे के अनुसार जो बिलकुल सही और सटीक है वह एक उसका संबंधी और उससे संबंधित होना चाहिए और उसके पास भूमि को छुड़ाने के लिए सामथ्र्य और प्रेम होना चाहिए। परन्तु इस भूमि पर कोई भी भूमि को छुड़ाने के लिए योग्य नही है।
प्रकाशितवाक्य 5:4 हमें बताता है कि एक लिखित प्रमाण या एक सूचिका है जो कहता है कि पमरेश्वर ने आदम के द्वारा आज्ञा का उल्लंघन करने के कारण सारे अधिकार यहाँ तक कि पृथ्वी पर राज्य करने का भी अधिकार शत्रु शैतान को दिया। परन्तु वह अधिकार परमेश्वर को वापस दियें जा सकते थे जो इसे छुड़ा सकें। प्रेरित यूहन्ना रोने लगें क्योंकि कोई भी नही था जो इस लिखित प्रमाण को खोल सकें। परन्तु वचन कहता है कि “मत रो“ यहूदा के गोत्र का वह सिंह जों दाउद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मोहरों को तोड़ने के लिए जयवंत हुआ है।
फिर वह क्या शर्ते है जो भूमि के छूटकारे के लिए है।
वह चार शर्ते इस प्रकार से है।

पहला वह आदम का संबंधी होना चाहिए अर्थात वह मनुष्य होना चाहिए।
रोमियों 5:12 कहता है इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। रोमियों 5:19 कहता है क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। इसलिए यदि कोई आता है और मनुष्यजाति को पाप से छुड़ाता है वह पमरेश्वर के बच्चों को भी शत्रु शैतान के राज्य से बाहर निकाल सकता है। भूमि के छूटकारे के नियम के अनुसार यदि कोई अपनी भूमी बेच भी दे तौभी वह उसे हमेशा के लिए नही बेच सकता है। यदि बेचने वाला उसे वापस लेना चाहे तो खरीदने वाले को उसे वापस देना होगा। और यदि बेचने वाले मे उसे वापस खरीद लेने की साम्थ्र्य नही है तो बेचने वाले का कोई संबंधी जो उसके करीब हो उस भूमि को बेचने वाले की जगह खरीद सकता है इसलिए शैतान के राज्य से परमेश्वर के बच्चों को छुड़ाने के लिए , छुड़ाने वाला आदम से संबंधित होना चाहिए और वह मनुष्य होना चाहिए।

दूसराः वह आदम का वशंज नही होना चाहिए।
क्योंकि आदम पर आज्ञा न मानने का पाप है सारी मनुष्यजाति जो कि आदम से उत्पन्न हुई है असल मे पापी है। क्योंकि एक पापी दूसरे पापी को नही छुड़ा सकता , छुड़ाने वाला आदम का वंशज नही होना चाहिए। जिन्होने पाप किया था। प्रेरित यूहन्ना ने ऐसे ही एक को खोजने की कोशिश की थी। जब उसने ऊपर स्वर्ग की ओर देखा तो उसे केवल स्वर्गदूत दिखाई दियें। जब उसने पृथ्वी पर देखा तो उसे केवल पापी दिखाई दियें। जो कि आदम के वंशज थें। अधलोक मे केवल शत्रु शैतान थे। तो उसे कोई भी ऐसा नही मिला । (प्रकाशितवाक्य 5:1-3)
तो क्या यीशु मसीह मे वे सब योग्यताएं थी जो कि भूमि की छुड़ौती के दूसरे नियम को पूरा करें। यीशु ने देह मे दाउद के घराने मे जन्म लिया था।
परन्तु वह पुरूष और स्त्री के संयोजन से पैदा नही हुआ था। इसलिए वास्तविकता मे वह पापी नही था। वह एक ऐसे मनुष्य के समान जन्मा जो हमे पाप से छुड़ा सकता है। परन्तु वह पवित्र आत्मा के द्वारा उत्पन्न हुआ। और कुँवारी मरियम के शरीर मे गर्भ मे आया। इसलिए वह आदम का वंशज नही है। ( मत्ती 1:18-21)
तीसरा: उसके पास भूमि को छुडाने की साम्थ्र्य होनी चाहिए।
बिल्कुल इसी तरह यह बिलकुल बेकार है यदि आप अपना कर्ज चुकाना चाहो लेकिन आप के पास सामर्थ न हो। भूमी के छूटकारे के लिए उसके पास सामर्थ होना जरूरी है। यदि प्रतिद्वंदी की सामर्थ ज्यादा है और वह उसे वापस न लौटाना चाहे तो आप उसे नही ले सकतें है। इसलिए आपकी सामर्थ प्रतिद्वंदी से ज्यादा होनी चाहिए। आत्मिक क्षेत्र के अनुसार शत्रु शैतान पर विजय पाना ही साम्थ्र्य है। यह करने के लिए, उसके अंदर कोई पाप नही होना चाहिए।
तो क्या यीशु मसीह मे तीसरी शर्त को पूरी करने की योग्यता है। वास्तव मे उसमें कोई पाप नही था क्योंकि वह आदम का वंशज नही था। उसने कभी कोई पाप नही किया था। क्योंकि उसने अपने जीवन के 33 वर्षो तक सभी नियमो का पालन किया था। उसके जन्म के आठवें दिन उसका खतना किया गया। और जब तक कि वह 30 वर्ष का नही हो गया तब तक उसने अपने माता पिता का आदर किया। जिसके बाद कोई भी अपने माता पिता को छोड़ के जा सकता है। उसके बाद उसने अपनी सेवकाई शुरू की। क्योंकि यीशु ने कभी कोई पाप नही नही किया। इसलिए उसके पास भूमि को छुड़ाने की सामर्थ थी। इसलिए अंत मे शत्रु शैतान ने सभी अधिकार वापिस दिये।
चैथाः उसमे प्रेम होना चाहिए।
यहां तक कि यदि कोई ऊपर दी गई सभी शर्ताे को पूरा भी करता है परन्तु वह प्रेम नही रखता जो कि सबसे जरूरी है। यह किसी काम का नही। यह बिलकुल इसी तरह है। जैसे कि छोटे भाई ने एक बड़ा पाप किया है। यदि उसके बड़े भाई के पास बहुत सा धन हो परन्तु वह किसी काम का नही है यदि वह अपने छोटे भाई के पाप का मूल्य दे कर छूड़ा न सकें। रूत 4:6 कहता है उस छुड़ानेवाले कुटुम्बी ने कहा, मैं उसको छुड़ा नहीं सकता, ऐसा न हो कि मेरा निज भाग बिगड़ जाए। इसलिये मेरा छुड़ाने का अधिकार तू ले ले, क्योंकि मुझ से वह छुड़ाया नहीं जाता। हम देख सकतें है कि इस व्यक्ति मे भूमि छुड़ाने की काबिलियत थी परन्तु उसने नही छुड़ाया। यदि यीशु के अंदर ऐसा प्रेम नही होता कि वह अपने आप को हमारे लिए कू्रस पर कुर्बान करें , तो मनुष्यजाति परमेश्वर के बच्चे न बनकर शैतान की संतान बन जाते। परमेश्वर के प्रेम के कारण यीशु पृथ्वी पर आए, पापियों को क्षमा देने , बिमारियों को चगां करने, अन्याय की जंजीरे तोड़ने, शान्ति देने, आंनद और प्रेम देने और केवल अच्छा काम करने। यद्यपि वह क्रूसित हुआ और अपना सारा लहू अपने ही लोंगो के द्वारा बहाया। उद्धार के रास्ते को खोलने के लिए। क्योंकि परमेश्वर ही प्रेम है इसलिए उसने अपना एकलौता पुत्र भी नही रख छोड़ा। यीशु ने भी परमेश्वर का अनुसरण किया और क्रूस को प्रेम से उठा लिया।
इसलिए कि एक यीशु मसीह ही है जो भूमि को छुड़ाने के योग्य है । किसी और के नाम के द्वारा नही परन्तु केवल यीशु मसीह के नाम के द्वारा हम बचाए गए है । (प्रेरितों के काम 4:12)
आइये हम इसे साफ साफ महसूस करे। परमेरूवर की संतान होने का अधिकार प्राप्त करें। समृद्धि के साथ हर चीज मे आशीषित जीवन बिताएँ जो कि उद्धार को प्रमाणित करता है। और हमेशा परमेश्वर को महिमा देते रहें।

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