अध्याय 7 – पवित्र आत्मा कौन है?

अध्याय 7

पवित्र आत्मा कौन है?

1. पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर मे से एक है।

जो परमेश्वर के प्रावधान को पूरा करता है। वह पमरेश्वर पवित्र आत्मा है। परमेश्वर की त्रिएकता से अभिप्राय है परमेश्वर पिता, परमेश्वर पुत्र, पमरेश्वर पवित्र आत्मा। वे अलग अलग तरह से कार्य करते है। पर वे एक ही परमेश्वर है। इसलिए पमरेश्वर पवित्र आत्मा के वे ही गुण है जो पमरेश्वर पिता के है। परन्तु यह पमरेश्वर की आत्मा की तरह पमरेश्वर पिता की इच्छा पूरी करने का कार्य करता है।
पमरेश्वर पवित्र आत्मा पमरेश्वर पिता के साथ अनन्त काल से भी पहले से है। पुराने नियम मे पवित्र आत्मा पमरेश्वर की आत्मा की तरह कार्य करता था। नये नियम मे, पमरेश्वर पवित्र आत्मा की तरह सलाहकार का कार्य करता है। और वह हमारे साथ अनन्तकाल तक रहेगा। (इब्रानियों 9:14) अब पवित्र आत्मा के कार्य के बारे मे जानते है। जो पमरेश्वर के साथ एक होकर कार्य करता है। सबसे पहले (उत्पति 1:1) कहता है आदि मे पमरेश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी करी रचना की। पृथ्वी बेड़ौल और सुमसान पड़ी थी और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था। तथा पमरेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डराता था। हम यह देखते है कि पवित्र आत्मा ने पमरेश्वर के रचना के कार्य मे सहयोेग किया। और उसने पादरियों, भविष्यद्वावक्ताओं और राजाओं पर पमरेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए कार्य किया। पवित्र आत्मा ने इस्राइल के इतिहास पर भी कार्य किया। (उत्पति 31:35) कहता है कि यूसुफ एक मनुष्य था जिसमें पमरेश्वर का आत्मा था और याकुब की भी मदद करता था। निर्गमन 31:35 पमरेश्वर ने बसलेल को बुलाया और उसको पमरेश्वर की आत्मा से भरा ताकि निवास स्थान की इमारत बनाने का कार्य ठीक से हो।
न्यायधीशों के समय में, पमरेश्वर ने न्यायधीशों को नियुक्त किया, उनको अपनी आत्मा से भरा और इस्राइल को बचाया (न्यायियों 3:7-10, 16:34)। पमरेश्वर का आत्मा शमुएल पर उतरा जो कि अन्तिम न्यायी और भविष्यद्वक्ता था। शाऊल जो कि पहला राजा था और उसके बाद दाऊद (शमूएल 10:10, 16:13, 19:52)। इस्राइल का राजा बना। इन सबके अतिरिक्त पवित्र आत्मा बहुत से भविष्यद्वक्ताओं पर उतरा ताकि वे भविष्यवाणी कर सकें और पमरेश्वर के प्रावधान को पूरा करें।
पुराने नियम के समय में पवित्र आत्मा उन पर उतरता था जो पमरेश्वर के प्रति वफादार होते थे। और जो उद्धारकर्ता का इन्तजार कर रहें थें। ताकि वे यीशु का पहचान सकें(लुका 2:25-28) यीशु ने भी पमरेश्वर की इच्छा को पवित्र आत्मा की सहायता द्वारा पूरा किया। और उद्धार का प्रावधान पूरा किया। इसलिए जो कोई यीशु मसीह को ग्रहण करेगा वह ववित्र आत्माा को प्राप्त करेगा और पमरेश्वर की संतान बन जाएगा।
पुराने नियम के समय पमरेश्वर का पवित्र आत्मा लोगों के हृदय में नही होता था। क्योंकि वे पाप में थें। तो वे पमरेश्वर की मदद तब पा पाते थे जब उन पर आत्मा आता था और उन मे प्रवेश करता था। परन्तु नयें नियम के समय मे पवित्र आत्मा हमारे अन्दर वास करता है। क्योंकि प्रभु यीशु मसीह ने हमें पापों और अपराधों से मुक्त कराया है। इसलिए हमें सीधे तौर पर पमरेश्वर की सहायता प्राप्त होती है। इसलिए रोमियों 8:11 कहता है और यदि उसी का आत्मा जिस ने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिस ने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरनहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।
यीशु मसीह जो मुर्दो मे से जी उठा, स्वर्ग पर चढ़ने से पहले उसने अपने चेलों को आशीषे प्राप्त करने के मार्ग को बताया। मती 28:19-20 मे लिखा है। इसलिए तुम जाओं सब जातियों के लोगों को चेला बनाओं और उन्हे पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा के नास से बपतिस्मा दो और उन्हे सब बातें जो मैने तुन्हे आज्ञा दी है मानना सिखाओ और देखों मै जगत के अन्त तक सदा तुम्हारे सगं हँू। हम इस वचन से जान सकते है कि पवित्र आत्मा पमरेश्वर के साथ एक है।
इसके विपरित (प्रेरितों के काम 5:3-4) मे हनन्याह और सफीरा ने अपनी भूमी बेची और उसके दाम मे से कुछ रख छोड़ा। पतरस ने उनसे कहा। हे हनन्याह, शैतान ने तेरे मन मे यह बात क्यों डाली कि तू पवित्र आत्मा से झूठ बोले और भूमि के दाम मे से कुछ रख छोड़े। पतरस ने हनन्याह को झिड़का और कहा तूने मनुष्यों से नही, परन्तु पमरेश्वर से झूठ बोला है ये बातें सुनते ही हनन्याह गिर पड़ा और प्राण छोड़ दिए, यह इसलिए हुआ क्योंकि पवित्र आत्मा को धोखा देना मतलब पमरेश्वर को धोखा देना ही है।

2. वह मददगार है।

मददगार का अर्थ है वेा जो मदद के लिए बुलाया जाता है युहन्ना 14:16-17 और मैं पिता से विनती करूँगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। युहन्ना 14 अर्थात् सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता हैः तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
क्योंकि मनुष्यजाति पाप के कारण पमरेश्वर को नही देख सकती इसलिए पमरेश्वर ने स्वयं को प्रकट करने के लिए अपने पुत्र यीशु को धरती पर भेजा ताकि मनुष्य के उद्धार का कार्य पूरा हो सके। लेकिन क्योंकि यीशु को उद्धार का कार्य करने के बाद वापस स्वर्ग मे जाना था। इसलिए एक दूसरा सहायक भेजा, वह सत्य का आत्मा है जिसे पवित्र आत्मा कहा जाता है।
पवित्र आत्मा पमरेश्वर की उन संतानो के हृदय मे रहता है जिन्होने यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार किया है और उन्हे सत्य की ओर ले जाता है यूहन्ना 14:26 कहता है परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा। वह तुम्हे सब बातें सिखाएगा और जो कुछ मैने तुम से कहा है वह सब तुम्हे स्मरण कराएगा। 1 कुरिन्थियों 3:16 कहता है क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? और 2 तीमुथियुस 1:14 कहता है और पवित्र आत्मा के द्वारा जो हम में बसा हुआ है, इस अच्छी थाती की रखवाली कर।। यूहन्ना 14:16-17 के अनुसार पवित्र आत्मा परमेश्वर की संतानो के संग रहेगा। यूहन्ना 14:26 कहता है और पवित्र आत्मा हमे परमेश्वर का वचन सिखाएगा और स्मरण कराएगा । युहन्ना 16:13 कहता है परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा। जबकि पवित्र आत्मा अदृश्य है लेकिन उसमें मानवीय गुण है इसलिए जब पमरेश्वर के बच्चे पवित्र आत्मा के अनुसार चलते है और पमरेश्वर के अनुसार कार्य करते हैं। वह हमें खुशी देता है और पवित्र आत्मा की भरपूरी देता है। ताकि हम जान सकें कि पमरेश्वर हमसे खुश है। इसके विपरित यदि हम पवित्र आत्मा की इच्छा अनुसार नही चलते और अपने पिछले जीवन के समान पाप करते रहतें है तो पवित्र आत्मा हमें यह एहसास दिलाता है कि पमरेश्वर हमे से खुश नही है।
रोमियों 8:26 कहता है इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करनी चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। प्रेरितो के काम 9:31 में और 20:28 कहता है वह हमे आनंदित करता है और सिखाता है। हमे क्या करना है और पमरेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों मे भरता है ताकि हम पापों के विरूध लहू बहाने तक सघर्ष कर सकें और पमरेश्वर कि इच्छा अनुसार चल सकें।

3. वह पमरेश्वर का वरदान है।

जब हमे कोई वरदान मिलता है तो हम खुश होते है। इसलिए नही कि हमें उपहार मिला है पर इसलिए कि हम उपहार देनेवाले के प्रेम को महसूस करतें है। परन्तु इस संसार मे समय बिताने के साथ साथ उपहार का मूल्य कम होता जाता है। चाहे कितना भी मंहगा उपहार क्यों न हो। यह इसलिए है कि वह हमेशा बना न रहेगा। अब यहां ऐसा उपहार है जो हमेशा के लिए बना रहेगा। और यह क्या है? यह उपहार पमरेश्वर द्वारा दिया गया है जो नष्ट न होने वाले और प्रेम से भरा हुआ है। इसकी तुलना संसार कि किसी भी मूल्यवान वस्तु से नही कि जा सकती और न किसी व्यक्ति द्वारा दी गई किसी वस्तु से हम इसकी तुलना नही कर सकते।
प्रेरितों के काम 2:38 कहता है पतरस ने उन से कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे। पमरेश्वर ने हमे यीशु मसीह को दिया है ताकि विश्वास के द्वारा हम उद्धार और अनन्त जीवन प्रात्प कर सकें। प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस का दुख उठाकर और पुनः जीवित होकर और स्वर्ग मे जाने के द्वारा उद्धार का मार्ग खोला है। यह “पवित्र आत्मा है“ क्योंकि फिर पिता परमेश्वर पवित्र आत्मा को एक दान कहतें है। परमेश्वर ने जब मनुष्य को बनाया तो उसे प्राण सहित अपने ही रूप में बनाया और मनुष्य परमेश्वर के साथ सम्पर्क कर सकता था। जो कि आत्मा द्वारा नियन्त्रित किया जाता था। और उसकी देह अविनाशी भी थी जो कि प्राण और आत्मा को एक बर्तन की तरह रखती थी। परमेश्वर ने फिर मनुष्यों को अपनी संतान होने का अधिकार दिया। मनुष्य परमेश्वर की इच्छा अनुसार जीता था और परमेश्वर से संपर्क मे रहता था। परमेश्वर ने मनुष्य के लिए आवश्यक वातावरण तैयार किया और मनुष्य को सब चीजों पर बहुतायत और सर्वाेच अधिकार दिया।
परन्तु आदम की अनाज्ञाकारिता के कारण मनुष्यों पर मृत्यु आई और आत्मा जो कि मनुष्य को नियन्त्रित करता था मर गया। उस समय से मनुष्य ने परमेश्वर से सपंर्क और परमेश्वर की संतान होने का अधिकार खो दिया। मनुष्य इस शापित संसार मे दुखों , पीड़ाओं, बीमारियों और मृत्यु जो शत्रु शैतान द्वारा लाई जाती है रहने आया । क्योंकि अब शरीर अविनाशी नही रहा इसलिए शरीर को मरना पड़ता है। और वापस मिटृी मे मिल जाता है। वह बिना मेहनत के नही खा सकता है। वह जन्म देने की बहुत पीड़ा सहन करने के बाद ही संतान प्राप्त कर सकता है। वह अब परमेश्वर को नही देख सकता है।
इसके अतिरिक्त आदम की संतान जो मृत आत्मा सहित उत्पन्न हुई उनको परमेश्वर की संतान होने का सुख प्राप्त नही हुआ। कोई भी इन श्रापों से नही बच सकता है। जब तक की उसकी आत्मा पुनः जीवित नही हो जाए।
इसलिए युहन्ना 3:6 कहता है क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है। और युहन्ना 6:63 मे लिखा है आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहींः जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं। इसका अर्थ है पवित्र आत्मा ही मनुष्य की मृत आत्मा को जिला सकती है। हमारी आत्मा तभी जीेवित हो सकती है जब हम आत्मा को पवित्र आत्मा द्वारा जन्म दें। यहां तक कि कोई भी शक्तिशाली मनुष्य या प्रक्रिया मनुष्य की मृत आत्मा को नही जिला सकती है। और न उस श्रापों से मुक्त कर सकती है।
पवित्र आत्मा हमारी मृत आत्मा को जिला सकती है। इसलिए यदि हम पवित्र आत्मा को प्राप्त करें तो हमारी मृत आत्मा पुनः जीवित हो जाएगी और हम परमेश्वर की आशिषों को भी पुनः प्राप्त कर सकते है। जो आशिषें हमने आदम की अनाज्ञाकारिता के कारण खो दी और श्रापित जीवन से भी मुक्त हो सकतें है। कोई भी जो सत्य को महसूस करता है और सत्य पवित्र आत्मा को पाना चाहता है यदि वह पवित्र आत्मा को पाने का मार्ग जानता है। तो वह अवश्य ही पवित्र आत्मा को प्राप्त करेगा। यदि सिर्फ वह इस तथ्य को जानता है कि पवित्र आत्मा परमेश्वर की संतान बनने के लिए जरूरी है। तो परमेश्वर जो सर्वषक्तिमान और प्रेमी है और हमें सारी आशीषें दे सकता है। यदि परमेश्वर उसे पवित्र आत्मा देने का वादा कर दे तो वह उस दिन का इन्तजार बहुत खुशी के साथ करेगा।
पवित्र आत्मा मनुष्य के लिए इसलिए आवश्यक और मूल्यवान है क्योंकि उसके पास इस संसार की सभी समस्याओं को जड़ से मिटा देने की सामर्थ है। परमेश्वर किसी का पक्षपात नही करता वह किसी को भी जो प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकारता है पवित्र आत्मा दे सकता हैं। और उसे पापों की क्षमा और परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दे सकता है। यह किसी खोए हुए बच्चे को वापस पाने के समान है। इसलिए परमेश्वर खुशी से हमे पवित्र आत्मा प्रदान करता है और अपनी संतान बना लेता है।
इसलिए परमेश्वर हमें बाइबल मे बताता है पवित्र आत्मा परमेश्वर की ओर से एक तोहफा है। प्ररितों के काम 5:32 कहता है पवित्र आत्मा जिसे परमेश्वर अपनी आज्ञा मानने वालों को देता है। प्रेरितों के काम 10:45, 11:17, 15:8 कहता है कि पवित्र आत्मा अन्यजातियों को भी दिया गया। प्रेरितों के काम 8:17-20 मे पतरस एक व्यक्ति को झिड़कता है जो कि पैसे से पवित्र आत्मा को खरीदना चाहता था।
पवित्र आत्मा परमेश्वर के साथ एक है। और यह उपहार के तौर पर परमेश्वर के बच्चों को मिलता है। जो कि यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करतें है। और उन्हे पापों की क्षमा मिलती है। यह इतना मूल्यवान है कि हमें यह सहायक की तरह सत्य की ओर लियें चलता है। तो हमें पवित्र आत्मा को अपने हृदयों मे रखना चाहिए ताकि हम परमेश्वर की संतान होने का अधिकार प्राप्त करें और अनन्त जीवन भी। हमे परमेश्वर की संतान बनना चाहिए ताकि हम स्वस्थ रहें और हमारे साथ हर बात अच्छी हो जैसे जैसे हमारी आत्मा पवित्र आत्मा के द्वारा समृद्ध हों।

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