‘‘क्रूस का संदेश-4’’

क्योंकि परमेश्वर आत्मा है, इसलिए हम अपनी इन आँखों से उसे नहीं देख सकते। पर फिर भी कर्इ प्रकार से अपने आप को हम पर प्रकट करता है। जैसे परमेश्वर सृष्टि की सभी वस्तुओं द्वारा, लोगों की ऊन गवाहियों द्वारा जिन्होंने उसके सामथ्र्य से चंगार्इ प्राप्त की है, और बाइबल द्वारा एक दम स्पष्ट रूप से वह अपने आप को हम पर प्रकट करता है और इसलिए जब हम बाइबल पढ़ते है तो उद्धार के सिद्धान्त (Doctrine of Salvation) के बारें में विस्तृत रूप से सीख सकते हैं। जिसमें अनेकों विषय शामिल हैं जैसे ‘‘मनुष्य की रचना करने के लिए परमेश्वर का उद्देश्य’’ ‘‘वे तरीके जिनके द्वारा परमेश्वर मानव इतिहास पर अधिकार रखता है’’, ‘‘मनुष्य की सभ्यता का आरम्भ और अन्त’’ ‘‘स्वर्ग और नर्क’’, ‘‘हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह’’ और ‘‘मनुष्य का पूर्ण कर्तव्य’’ भी शामिल है। आगे, इनके द्वारा हम परमेश्वर के सच्चे स्वरूप के बारें में सीख कर और जीवित परमेश्वर से भेंट कर, उद्धार और अनन्त जीवन तक पहुंच सकते हैं।

 

प्रकाशन का क्रम

परमेश्वर कौन है?

  1. वह सृष्टिकर्ता परमेश्वर है।
  2. वह ‘‘मै जो हूँ सो हूँ’’ है।
  3. वह सर्वशक्तिमान है।
  4. वह बार्इबल का लेखक है।

‘‘सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा, ताड़ना, सुधार और धार्मिकता की शिक्षा के लिए उपयोगी है। (2 तीमुथियुस 3:16)

  1. परमेश्वर बाइबल का लेखक है।

बाइबल 66 किताबों से मिलकर बनी है। 39 किताबें पुराने नियम में और 27 नये नियम में है। 34 लोगों को बाइबल को लिखने के लिए जाना जाता है जिनमें 26 लोग पुराने नियम से और 8 लोग नये नियम से हैं। इसे लिखने में लगभग 1600 वर्षों का समय लगा, 1500 वर्ष का समय पुराने नियम और 100 वर्ष नये नियम में लगे। यद्यपि 34 अलग अलग लोगों ने इसे लिखा लेकिन फिर भी इनमें से कोर्इ भी इसका ‘लेखक’ नहीं था वे सब आत्मा के द्वारा प्रेरित लेखक थे।

कल्पना कीजिए एक माँ के दो बेटे हैं, और वह अपने छोटे बेटे को खत लिखना चाहती है, और यदि वह अपने बड़े बेटे से छोटे बेटे को एक खत लिखवाती है और उस खत में वो सब लिखवाती जो वह अपने छोटे बेटे से कहना चाहती है तो यह खत किसका होगा? जबकि यह खत बड़े बेटे ने लिखा है फिर भी यह खत माँ का ही कहलाएगा क्योंकि वह उसकी तरफ से लिखा गया है।

ठीक इसी प्रकार से परमेश्वर ने बहुत से लोगों को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जो उसकी दृष्टि में सही थे और उनके द्वारा परमेश्वर के वचन को पवित्र आत्मा की प्रेरणा से लिखवाया।

यहां पर 2 तीमुथीयुस 3:16 बताता है ‘‘सम्पूर्ण पवित्र आत्मा परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा, ताड़ना, सुधार और धार्मिकता की शिक्षा के लिए उपयोगी है और पतरस 1:21 हमें याद दिलाता है ‘‘क्योंकि कोर्इ भी भविष्यवाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुर्इ, परन्तु लोग पवित्र आत्मा की प्रेरणा द्वारा परमेश्वर की ओर से बोलते थे। यशायाह 34:16 में भी लिखा है। यहोवा की पुस्तक से खोजकर पढ़ो – इनमें से एक भी न छूटेगा, कोर्इ अपने जोडे़ से अलग न रहने पाएगी। क्योंकि यह आदेश उसी के मुँह से निकला है और उसके आत्मा ने उनको एकत्रित किया है।

क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने बार्इबल के अभिलेखों को पवित्र आत्मा की प्रेरणा से रचा है। इसीलिए इसके बावजूद की इसे बहुत से लोगों ने लिखा है फिर भी बार्इबल कहीं भी विरोधात्मक नहीं है परन्तु सभी वचन एक दूसरे से मेल खाते हैं।

  1. बार्इबल पवित्र आत्मा की प्रेरणा में दर्ज की गर्इ है।

क्योंकि बाइबल पवित्र आत्मा की प्रेरणा में दर्ज की गर्इ है तो यह भी जरूरी है कि इसका अनुवाद भी पवित्र आत्मा की प्रेरणा में किया जाए यदि बाइबल के अनुवाद मनुष्य की सोच के अनुसार करने की कोशिश की जाएगी तो हो सकता है कि वह बहुत से लोगों को नाश के मार्ग पर ले जाए क्योंकि हो सकता है कि ऐसा अनुवाद परमेश्वर की इच्छा के साथ सहमत न हो (2 पतरस 3:16)। जब इसका अनुवाद पवित्र आत्मा की प्रेरणा में होता है तो हम सीखते हैं कि बाइबल का कोर्इ भी पद अलग-थलग बिना जोड़े के नहीं हैं (यशायाह 34:16)। जिस प्रकार से एक हार को बनाने के लिए बहुत से मोतियों की जरूरत होती है ठीक उसी प्रकार से बाइबल के पदों के आघ्यात्मिक महत्व को तभी स्पष्ट रूप से समझाया जा सकता है जब यह पद एक दूसरे के साथ जुड़ते हैं और एक दूसरे के पूरक बनते हैं।

उदाहरण के लिए, प्रेरितों के काम 2:21 हमें बताता है, ‘‘और ऐसा होगा कि जो कोर्इ प्रभु का नाम लेगा वह उद्धार पाएगा’’ उद्धार के बारें में परमेश्वर की इच्छा का विवरण केवल इस पद से स्पष्ट नहीं किया जा सकता। जैसा कि हमारे प्रभु ने मत्ती 7:21 में कहा है, ‘‘प्रत्येक जो मुझसे हे प्रभु! हे प्रभु! कहता है, स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा’’ केवल प्रभु का नाम बोलने से उद्धार प्राप्ती की शर्त पूरी नहीं हो जाती। जैसा कि रोमियों 10:10 हमें याद दिलाता है ‘‘मनुष्य तो हृदय से विश्वास करता है’’, जिसका परिणाम धार्मिकता होता है, और मुंह से अंगीकार करता है जिसका परिणाम उद्धार होता है। केवल वे ही जो हृदय से विश्वास करते, और धर्मि ठहरते हैं वे उद्वार प्राप्त कर सकते हैं जब वे अपने होठों से उद्वारकर्ता का अंगीकार करते हैं।

तब एक व्यक्ति के लिए इसका क्या अर्थ हुआ? – ‘‘हृदय से विश्वास करना?’’ याकूब 2:14 हमसे सवाल करता है ‘हे मेरे भार्इयों, यदि कोर्इ कहे कि मैं विश्वास करता हूं, पर कर्म न करे, तो इस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास उसका उद्वार कर सकता है? जब कोर्इ व्यक्ति हृदय से विश्वास करता है और उसका परिणाम धार्मिकता होता है, तो हम देख सकते हैं कि उसे अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए और परमेश्वर के वचन के अनुसार चलने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता है।

इसके साथ ही रोमियों 3:28 में लिखा है ‘‘इसलिए हम इस परिणाम पर पहुंचते है कि मनुष्य वयवस्था के कामों से नहीं, वरन विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराया जाता है’’ इस बात का कोर्इ महत्व नहीं है कि आप कितने परिश्रम के साथ सत्य का जीवन जीते हैं लेकिन जब तक आपके कार्य विश्वास के नहीं हैं तब तक आपके कार्यों द्वारा आप धर्मी नहीं ठहर सकते। ‘‘हृदय के साथ विश्वास करना’’ का अर्थ एक पवित्र हृदय को स्थापित करना है जिसका परिणाम पवित्र आचरण होता है या दूसरे शब्दों में हृदय का खतना (शुद्ध) किया जाना है। उद्धार केवल उन विश्वासियों के लिए है जिन्होंने अपने हृदय का खतना कर लिया है जैसे कि वे हृदय से विश्वास करते हैं, परमेश्वर के वचन  अनुसार चलते हैं और अपने होठों से प्रभु का अंगीकार करते हैं। बाइबल के इन पदों के जोड़ों को पाए बिना लोग सत्य को ठीक ठीक नहीं सीख सकते और यह विचार धारा बना लेंगे और सोचेंगे कि ‘‘उद्धार तो प्रत्येक के लिए है जो यीशु को अपना उद्धारकर्ता अंगीकार करता है’’ या ये कि ‘‘जब तक तुम विश्वास करते हो उद्धार को प्राप्त कर सकते हो जबकि यदि तुम पाप में हो’’  इस तरह की गलत समझ लोगों को पाप में डालती है और अंत में नाश की ओर ले चलती है।

परमेश्वर की इच्छा को बिल्कुल सही ढंग से समझने के लिए और उसके आध्यात्मिक महत्व को जानने के लिए जो कि बाइबल के पदों में है आपके लिए जरूरी है आप इन पदों के जोड़ों को एक दूसरे से जोड़ें और तब पवित्र आत्मा की आगुवाइ में इसका अनुवाद करें।

  1. परमेश्वर का वचन अनन्त सत्य।

बाइबल परमेश्वर का वचन है और इसकी सभी बातें जो लिखी गर्इ है, सत्य है। जैसे ऐतिहासिक घटनाएं जैसे इस्राएल का इतिहास, उसके आस पास के देशों और लोगों की घटनाएं, लोगों के नाम और स्थान उनका रहन सहन और वो सब कुछ जो हम पुराने नियम में पाते हैं बाइबल की सत्यता को प्रमाणित करते हैं। बाइबल में बहुत सी भविष्यवाणियां शामिल है। और उनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सभी यीशु मसीह से सम्बन्धित है। पुराने नियम में परमेश्वर ने यीशु मसीह के जन्म, सेवा, मृत्यु और पुर्नरूत्थान के बारे में भविष्यद्ववाणियों की है। जिन्हें घटनाएं और लेख बताते हैं कि कैसे प्रभु यीशु मसीह ने पुराने नियम की भविष्यद्ववाणियों को नये नियम में पूरा किया।

प्रभु यीशु के जन्म के बारे में उत्पत्ति (3:15) में लिखा है। परमेश्वर ने पहले से ही कह दिया कि उद्धारकर्ता इस्राएल के लोगों में जन्म लेगा। और जब परमेश्वर ने सर्प को श्रापित किया, उसने कहा ‘‘और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, तथा तेरे वंश और इसके वंश के बीच में, बैर उत्पन्न करूंगा, वह तेरे सिर को कुचलेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।

यहां पर ‘स्त्री’ आत्मिक रूप से इस्राएल को सम्बोधित करती है। यह स्वाभाविक है कि केवल स्त्री ही जन्म दे सकती है। परन्तु स्पष्ट रूप से ‘‘स्त्री’’ और ‘‘वंश’’ के उल्लेख द्वारा परमेश्वर एक आत्मिक अर्थ को दर्शाता है जो कि इस पद से जुड़ा है प्रकाशित वाक्य 12:5 में लिखा है उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जो लोहे के दण्ड से सब जातियों पर शासन करेगा। उस स्त्री का वह बच्चा परमेश्वर और उसके सिंहासन के पास उठा लिया गया।’’ इस प्रकार से यह पद भी हमें यीशु मसीह के बारे में बताता है जो इस्त्राएली लोगों के बीच में से पैदा होगा।

यशायाह 7:14 हमें बताता है ‘‘देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी। जबकि मीका 5:2 में लिखा है ‘‘परन्तु हे बैतलहम एप्राता, यद्यपि तु यहुदा के कुलों में बहुत छोटा है, फिर भी मेरे लिए तुझ में से एक पुरूष निकलेगा जो इस्त्राएल पर प्रभुता करेगा। उसका निकलना प्राचीन काल से वरन अनादिकाल से है। इन भविष्यद्वाणियों के अनुसार यीशु मसीह पवित्र आत्मा के द्वारा गर्भ में आया और सराय की चरनी में कुंवारी मरियम से पैदा हुआ। जब यीशु मसीह ने यरूशलम मे प्रवेश किया जिसके बारे में जकर्याह 9:9 ने पहले से बता दिया गया था, वह गद्धी के बच्चे पर बैठा है’’ इसके साथ ही भजनसंहिता 41:9 में बताया गया था कि कैसे प्रभु यीशु मसीह का परम मित्र जो कि उसके साथ रोटी खाता था उसके साथ विश्वास घात करेगा और उसे पकड़वाएगा।

उससे और अधिक असंख्य भविष्यवाणियां जो कि पुराने नियम की कर्इ किताबों में शामिल है, जिसमें यशायाह भजनसंहिता जकर्याह आदि है जिन्होंने यीशु मसीह के जीवन, मृत्यु दफनाने, पुर्नरूत्थान और पकड़वाए जाने से सम्बन्धित भविष्यवाणियां की है, और इनमें से हरेक नये नियम के समय मे पूरी हुर्इ है।

बार्इबल नि:संदेह पूरी तरह से परमेश्वर का वचन है और जैसे की उसकी प्रतिज्ञा है, कि वह जरूर उन लोगों को आशीषित करेगा जो इस पर विश्वास और इसके अनुसार जीवन बिताते हैं। उदाहरण के लिए यीशु मसीह ने मरकुस 9:23 में हमसे कहा ‘‘यदि तू कर सकता है? विश्वास करने वाले के लिए सबकुछ संभव है।’’ सिद्ध विश्वास करने वाले मनुष्यों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। निर्गमन 15:26 में हम पाते हैं कि जब हम अपने आप को पाप से दूर रखते हैं और पूरी तरह से परमेश्वर की आज्ञाओं को मानते हैं तो कोर्इ भी बीमारी हमारे पास नहीं आएगी यहां तक की यदि परमेश्वर की आज्ञाओं को न मानने के कारण किसी  बीमारी से घिर भी जाए तो भी हम परमेश्वर के सामर्थ्य द्वारा चंगार्इ प्राप्त कर सकते है। जब हम एक बार पश्चाताप करके पाप कि दीवार जो हमारे और परमेश्वर के बीच में खड़ी होती है गिरा देते है।

प्रभु यीशु मसीह में प्यारे बहनों और भाइयों,

जैसा कि उसने नीतिवचन 8:17 में हमसे कहा ‘‘जो मुझ से प्रेम रखते हैं उनसे मैं भी प्रेम रखती हूं। प्रभु यीशु मसीह के नाम में मैं प्रार्थना करता हूं कि परमेश्वर आपसे हमेशा मिले, आशिषें दे और आपको यरूशलेम में इकट्ठा करे जैसे की आप परिश्रमपूर्वक परमेश्वर की आज्ञाओं को मान रहे हैं और उसके अनुसार जीवन जी रहे है। आमीन

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