“क्रूस का संदेश-6”

क्यों परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को लगाया?

फिर यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह कहकर आज्ञा दी ‘‘तू वाटिका के किसी भी पेड़ का फल बेखटके खा सकता है, परन्तु जो भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष है उस में से कभी न खाना, क्योंकि जिस दिन तू उसमें से खाएगा उसी दिन तू अवश्य मर जाएगा। (उत्पत्ति 2:16-17)

परमेश्वर ने क्यों अच्छे भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को लगाया और मनुष्य को नाश के मार्ग में खड़ा कर दिया? यह वह प्रश्न है जो अक्सर बहुत से मनुष्य करते हैं जो उसके प्रेम और अद्भुत कायोर्ं को नहीं जानते और न ही उसकी उस योजना को जानते हैं जो मनुष्य का सभ्यता के विकास के लिए है। वे सोचते हैं कि यदि परमेश्वर भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को नहीं लगाता तो मनुष्य जाति बिना मृत्यु को देखे हुए हमेशा हमेशा अदन की वाटिका में रहती।

कुछ लोग इससे आगे भी एक प्रश्न रखते हैं ‘‘शायद परमेश्वर यह नहीं जानता था कि आदम इस भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाएगा’’। यद्यपि इस प्रकार का मतभेद केवल इस सच्चार्इ से जुड़ता है कि ये लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर विश्वास करने में असमर्थ हैं इसके साथ-साथ परमेश्वर के प्रेम का उद्देश्य कभी भी इस भले और बुरे के वृक्ष को लगा कर मनुष्य जाति को मृत्यु की ओर ले जाना नहीं था।

तब फिर क्यों परमेश्वर ने इस भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को लगाया और क्या कारण था की आदम ने अपने आप को मृत्यु के मार्ग पर पाया?

  1. आदम और हव्वा अदन की वाटिका में।

सृष्टि की रचना के समय पहला व्यक्ति आदम शारीरिक रूप से एक वयस्क मनुष्य था परन्तु मानसिक रूप से वह एक नये जन्मे बच्चे के समान था कल्पना कीजिए आदम की रचना के उस समय को इस प्रकार से जैसे एक बिल्कुल नया कम्पयूटर हो जिसमे कोर्इ भी डाटा या जानकारी न हो।

इसीलिए अदन की वाटिका में आदम के पास एक महान आत्मिक ज्ञान था, जिसमें परमेश्वर से सम्बन्धित चिजें, आत्मिक क्षेत्र, सत्य, अच्छार्इ, ज्योति आदि से सम्बन्धित बाते शामिल थी। इसके साथ ही साथ उसके पास वह जरूरी ज्ञान भी था। जिसके द्वारा वह सारी सृष्टि पर अधिकार रखता था। इस प्रकार से आदम सृष्टि की सभी वस्तुओं का स्वामी था, आदम के पास वह सभी योग्यताएं थी जिनसे वह सृष्टि कि सभी वस्तुओं पर अधिकार और उन्हें वश में रखता था।

जैसा कि परमेश्वर ने आदम से उत्पत्ति (1:28) में कहा, ‘‘परमेश्वर ने उन्हें आशिष दी और उनसे कहा ‘‘फूलो-फलो और पृथ्वी में भर जाओ और उसे अपने वश में कर लो’’ पहले मनुष्य ने जो रचा गया उसने बहुत से बच्चों को जन्म दिया और वे ‘‘फूले फले’’ और बहुत समय तक वह सभी वस्तुओं का स्वामी रहा। आदम के बिना कभी वे शक्तिशाली और महान अधिकार प्राप्त था फिर भी परमेश्वर ने मनुष्य को स्वतंत्र इच्छा दी थी और एक कार्य करने को मना किया था।

उत्पत्ति 2:16-17 में परमेश्वर ने आदम से कहा ‘‘फिर यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह कहकर आज्ञा दी, ‘‘तू वाटिका के किसी भी पेड़ का फल बेखटके खा सकता है, परन्तु जो भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष है उस में से कभी न खाना, क्योंकि जिस दिन तू उसमें से खाएगा उसी दिन तू अवश्य मर जाएगा। बहुत समय बीतने के बाद किसी तरह से आदम और हव्वा परमेश्वर की आज्ञा को अपने दिमाग में नहीं रख सके और उन्होंने उसे भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाकर समाप्त कर दिया।

  1. वह प्रक्रिया जिसमें पाप ने मनुष्य में प्रवेश किया।

जब तक कि हव्वा ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल नहीं खाया था स्त्री परिक्षा सांप द्वारा हुर्इ जो कि शैतान द्वारा उकसाया गया था और जिसने मूलभूत कार्य किया।

वह बात जिसके कारण बहुत से लोग सांप को आज अत्याधिक घिनौना मानते हैं क्योंकि साप ही है जो मनुष्य जाति को मृत्यु के मार्ग पर ले गया इसलिए वे स्वाभाविक रूप से सांप से बहुत घृणा करते हैं।

सांप की यह छवि जिसे हम आज देखते हैं हव्वा को परिक्षा करने के बाद और श्रापित होने के बाद बिल्कुल बदल गर्इ थी।

इससे पहले सांप प्रशंसा के योग्य और आंखों को आनन्द देने वाला था और क्योंकि वह चालाक भी था इसलिए वह लोगों के हृदय भी जीत लिया करता था।

एक दिन सांप ने स्त्री से पूछा ‘‘क्या परमेश्वर ने सचमूच कहा है कि तुम इस वाटिका के किसी भी वृक्ष में से न खाना? उत्तर में स्त्री ने कहा ‘‘वाटिका के वृक्षों के फल तो हम खा सकते हैं परन्तु उस वृक्ष के फल में से जो वाटिका के बीचों बीच है, परमेश्वर ने कहा है ‘‘कि न तो उस में से खाना और न उसे छूना, नहीं तो मर जाओगे’’ जबकि परमेश्वर ने हव्वा को विशेष तौर से यह कह दिया था कि यदि तुम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाओगे तो निश्चय ही मर जाओगे, परन्तु उसने सांप से कहा कि परमेश्वर ने उससे कहा है कि ‘‘न तो उस में से खाना और न उसे छूना नहीं तो मर जाओगे’’ दूसरे शब्दों में हव्वा के अनुसार परमेश्वर ने उसे कहा है कि पेड़ का फल खा सकने का एक संभावना है।

यदि आप परमेश्वर के वचन को ध्यान में रखने में असफल होते हैं या उसे बिगाड़ते है तो आप आसानी से शैतान द्वारा आजमाए जाते हैं। शैतान जानता था इस मौके का फायदा उठाना और उसने हव्वा से कहा ‘‘तुम निश्चय न मारोगे’’ क्योंकि परमेश्वर जानता है कि जिस दिन तुम उसमें से खाओगे, तुम्हारी आंखे खुल जाएंगी और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के समान हो जाओगे’’ अब हव्वा सांप की परिक्षा में फंस गर्इ कि फल खाने के लिए अच्छा आंखों के लिए लुभावना तथा बुद्धिमान बनाने के लिए चाहने योग्य है और अन्त में हव्वा ने उस फल को तोड़कर खाया और साथ ही साथ अपने पति को भी खाने को दिया।

इसका परिणाम यह हुआ कि परमेश्वर का वचन कि ‘‘तुम निश्चय मर जाओगे’’ मनुष्य पर लागू हो गया और आत्मिक क्षेत्र का नियम जो यह दर्शाता है कि ‘‘पाप की मज़दूरी मृत्यु है’’ (रोमियो 6:23) उन्हें भी अपने पाप की मजदूरी देनी पड़ी। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि भले और बुरे के वृक्ष का फल खाने के बाद आदम और हव्वा तुरन्त खत्म हो गए।

जब परमेश्वर ने कहा ‘‘तुम निश्चय मर जाओगे’’ का अर्थ न केवल मनुष्य कि शारीरिक मृत्यु से है आत्मिक मृत्यु से भी है। आदम और परमेश्वर के बीच वार्तालाप का न होना एक तरह से ‘‘आदम की आत्मिक मृत्यु है’’ इसके साथ ही आदम का प्रत्येक वंशज आदम के पाप के बाद पापी बन गया और मृत्यु को चखने लगा, जबकि पृथ्वी की प्रत्येक वस्तु भी श्रापित हो गर्इ (उत्पत्ति 3:17)।

सांप अन्य सभी जीव जन्तुओं से अधिक श्रापित हुआ ‘‘इसलिए की तू ने यह किया है’’ परमेश्वर ने सांप से उप्तत्ति 3:14 में कहा ‘‘तू सब घरेलू पशुओं और प्रत्येक वन-पशु से अधिक शापित है। तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटा करेगा। आत्मिक रूप से यहा पर ‘‘सांप’’ दुष्ट शत्रु और शैतान को दर्शाता है जबकि ‘‘मिटटी’’  मुनष्य को दर्शाती है जिसे भूमि की मिटटी से रचा गया।

दूसरे शब्दों में सांप मिटटी खाएगा का अर्थ है कि दुष्ट शत्रु और शैतान उन शारीरिक लोगों पर जो पाप में डूबे हुए हैं अधिकार रखेगा और उन पर परिक्षाए, दु:ख और सताव को लाएगा। इसीलिए वे लोग जो इस संसार में फंसे हुए वे सभी प्रकार के सतावों से पीड़ित रहते हैं जो उनके ऊपर अधिकार रखने वाले दुष्ट शत्रु शैतान के द्वारा लाए जाते है।

अदन की वाटिका में भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष।

यद्यपि परमेश्वर पहले से ही जानता था कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खा लेगा, इसके बावजूद भी परमेश्वर ने वह वृक्ष लगाया क्योंकि वह आदम को सच्ची खुशी देना चाहता था आदम को अदन की वाटिका में रहते हुए कोर्इ दु:ख नहीं था, एक बहुत ही सुन्दर, शान्ती और खुश हाली चारों तरफ थी इसमें वह सच्ची खुशी को अनुभव और महसूस करने में असफल था।

कोर्इ भी व्यक्ति किसी वस्तु की सच्चार्इ या वास्तविकता तभी जानता है जब वह उसकी विपरित स्थिति को अनुभव करे और फिर दोनो को मिलाकर देखे। जैसे कि यदि आप बचपन से कभी बीमार नहीं पड़े तो आप कभी भी पूरी तरह से उस सताव, दर्द और दु:ख को अनुभव नहीं कर सकते जो बीमारी लाती है, और तब आप वास्तविक अच्छी सेहत की प्रशंसा कर पाएंगे। केवल वे ही लोग अच्छे खाने की प्रशंसा करते हैं जो सचमुच भूखे होते हैं और केवल जहां पर दुष्टता और अंधेरा होता है, वहीं लोग वास्तविक अच्छार्इ और ज्योति की प्रशंसा करते हैं।

जब तक आदम ने अदन की वाटिका में मृत्यु और दु:ख को अनुभव नहीं मिला, आदम परमेश्वर को नहीं समझ पाया जब उससे कहा, ‘‘तुम मर जाओगे यदि तुम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाओगे’’ जब उसने उस दु:ख को महसूस किया जो भूखे रहने, सर्दी, गर्मी, मृत्यु पाप और दुष्टता से इस श्रापित संसार में मिलता है तो अन्त में आदम ने जाना की वह अदन की वाटिका में कितना खुश और आशीषित था।

यह बात कोर्इ महत्व नहीं रखती कि मनुष्य के जीवन का क्या उद्देश्य है और वह कितना आरामदायक और सरल है जब तक की वह उसमें वास्तविक खुशी का आनन्द न ले पाए। एक वास्तविक जीवन वह है जब मनुष्य यहां तक की क्षण भर की पीड़ा के बावजूद भी खुशी को अनुभव करता है। इसी कारण परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष को लगाया और मनुष्य को अनुमती दी की वह दु:ख सताव को अनुभव कर सके और इसमे तुलना करके इनको ज्ञान और समझ सके।

अपनी स्वतंत्र इच्छा से आदम ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाया और उसके पाप के परिणाम स्वरूप सारी मानवजाति को सभी प्रकार के सताव जैसे गर्मी, सर्दी, बीमारी, गरीबी, मृत्यु भूखमारी आदि के बीच में रहना पड़ रहा है। जब हम यह सब कुछ अनुभव करके स्वर्ग में प्रवेश करेंगे और तुलना करेंगे तो हम स्वर्ग के सुखदायी जीवन को अनुभव करेंगे और हृदय से परमेश्वर को धन्यवाद देंगे और एक हमेशा के आनन्दमय जीवन को प्राप्त करेंगे।

परमेश्वर शुरू से ही यह जानता था कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाकर पाप करेगा। इससे पहले की शुरूआत हो उसने एक मार्ग तैयार किया जिससे सभी पापी उद्धार को प्राप्त करें।

मनमिन समाचार के अगले अंक में मैं उद्धार के मार्ग का विस्तृत विवरण करूंगा जो परमेश्वर ने हमारे लिए बनाया है।

मसीह में प्यारे भाइयों और बहनों,

जैसा कि 2 कुरिन्थियों 4:17 में लिखा है। ‘‘क्योंकि हमारा पलभर का यह  हल्का-सा क्लेश एक ऐसी चिरस्थायी महिमा उत्पन्न कर रहा है जो अतुल्य है।’’ यहां तक की यदि हम इस संसार में कुछ क्षण के लिए दु:ख भी सहन करते हैं तो भी हम आनन्द मनाते हैं क्योंकि ‘‘अनन्त जीवन की महिमा सभी चिजों की तुलना से बाहर है।’’ वर्णन से बाहर है महिमामय स्वर्ग की सुन्दरता।

मैं आपके लिए प्रभु यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना करता हूं कि इसीलिए आप में से प्रत्येक गहरार्इ से परमेश्वर के प्यार को समझें जो आपको आनन्द देना चाहता है कि आपका जीवन एक प्रेम और आशा के साथ स्वर्ग के लिए एक उमड़ता हुआ जीवन है। आमिन

 

 

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