सिन्थिया परमेश्वर के सामर्थ्य के द्वारा जीवित बचने पायी।

सिंथिया उम्र 17 साल, पाकिस्तान के लाहौर शहर से।

ये 15 जून 1999 की बात है जब मैं 7 साल की थी। उस समय अचानक मैं जोर जोर से उल्टियां करने लगी। मेरे पापा ने मेरे लिए दूआ की और मैं ठीक हो गर्इ। सो उन्होंने सोचा यह कोर्इ बड़ी नहीं थी। लेकिन कुछ दिनों बाद मैने दोबारा उल्टियों करना शुरू कर दिया और दस्त से भी मैं परेशान हो गर्इ। यहां तक कि मैं नीले, हरे और पीले रंग का पदार्थ खांसते खांसते बाहर निकालती थी। और लैटरीन में खून आने लगा था। मेरा पेट बहुत सख्त हो गया था और मैं तीखा दर्द महसूस करती थी।


मुझे अस्पताल रशीद में भर्ती कराया गया। जांचा गया तो पता चला मुझे आंतों की बीमारी Celiac है। ऑप्रेशन करना असम्भव था क्योंकि मेरा शरीर बहुत कमजोर हो चुका था और वजन केवल 11 किलो था। नहीं मैं कुछ खा सकती थी और न ही अपनी शरीर हिला सकती थी।

मेरे परिवार ने उपवास और प्रार्थनाएं की और कलीसिया की सदस्यों ने भी मेरे लिए प्रार्थना की। मेरी बड़ी बहन जो उस समय कोरिया में रहती थी वो निराशा के कारण अन्तिम उपाय के लिए मनमिन सेन्ट्रल चर्च गर्इ, और मेरी फोटो पर डॉ. जैरॉक ली की प्रार्थना प्राप्त की। ठीक उसी वक्त आश्चर्यजनक घटना मेरे साथ घटित हुर्इ।
ये 23 जूलार्इ 1999, शुक्रवार की रात और कोरिया के समय अनुसार ठीक 10.50 बजे, जब पाकिस्तान में 7.50 का समय हो रहा था ठीक उसी समय जब डॉ. जैरॉक ली सीओल में प्रार्थना कर रहे थे मैं चंगी हो गर्इ थी। हालेलुय्याह!
प्रार्थना के केवल तीन दिन बाद मुझे ठीक से लैटरिन आना शुरू हो गया, आंते सामान्य हो गर्इं और डाक्टर्स भी हैरान थे। परमेश्वर की प्रशंसा हो!
मैंने भोजन खाना शुरू कर दिया और मेरा स्वास्थ्य भी ठीक होने लगा और तीन महीने बाद मैं बिना किसी सहायता के चल सकती थी। इस समय मैं हार्इस्कूल के पहले साल में हूं मेरा स्वास्थ्य भी अच्छा हो गया है अब मेरा सपना डाक्टर बनने का है और अपनी गवाही द्वारा परमेश्वर की महिमा करना है।
मैं परमेश्वर का धन्यवाद करती हूं जिसने आश्चयपूर्ण ढ़ंग से यीशु मसीह के नाम में डॉ. ली की प्रार्थना द्वारा मुझे चंगा किया

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