“क्रूस का संदेश-7”

क्यों यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है?

मानवजाति के लिए उद्धार का मार्ग भूमि छुडाने के नियम अनुसार

फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होनेवाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। 7 परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया।(1 कुरिन्थियों 2:6-7)

जब मसीही लोग दुसरे लोगों से कहते हैं जो परमेश्वर के प्रेम को नहीं जानते कि क्यों यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है, और हम किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं प्राप्त कर सकते, दूसरा समूह या तो भ्रम में पड़ जाता है या मसीहत को स्वयं धर्मी कि संज्ञा देता है। इस कारण यह अति महत्वपूर्ण हो जाता है कि हमे स्पष्ट और प्रामाणिक रूप से समझ हो कि केवल यीशु समीह ही हमारा उद्धारकर्ता है और इस सुसमाचार को सब लोगों तक पहुंचाने के लिए हम हर सम्भव प्रयत्न करनी चाहिए।

  1. आदम मृत्यु के मार्ग पर चल पड़ा।

विपत्ति और परेशानी के अनुभव बिना लोग सुख के महत्व को समझ नहीं सकते। जब लोग दुख कष्ट और पिड़ाओं को अनुभव करते हैं तब ही वे सुख के महत्व को समझ कर दिल से धन्यवाद देते है।

और इसी से मनुष्य को सापेक्षवाद का अनुभव होगा, परमेश्वर ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष के फल को खाने कि रोक लगार्इ क्योंकि उस वृक्ष के फल को खाते ही उनकी मृत्यु हो जाती। परमेश्वर ने आदम को स्वइच्छा दी जिसके साथ वह निर्णय ले सके अन्तत: आदम ने परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया और भले बुरे के वृक्ष से फल खाया।

आप में से कुछ पूछ सकते हैं ‘‘आदम पाप कैसे कर सकता था जबकि उसमें कोर्इ दुष्टता थी ही नहीं? इस बात को ध्यान में रखिए की चाहे किसी भी प्रकार से जब आदम ने भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल नहीं खाया क्योंकि उसके हृदय में कुछ दुष्टता था। लेकिन अपनी स्वतंन्त्र इच्छा से भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल को खाने के द्वारा आदम के हृदय में दुष्टता ने जन्म लिया और वह दुष्टता को जान गया। आज जब हम लोगों को देखते हैं, कि किस प्रकार से पाप तथा दुष्टमय स्वभाव में घिरे हुए हैं। इस तरह से हमे समझ ने में मदद मिलती है कि दुष्टता किस प्रकार से आदम के जीवन में आर्इ।

उदाहरण के लिए, एक बच्चा जो दूसरे बच्चों को मारता रहता है वह शुरू से ऐसा नहीं था। वेशक उसका पापमय स्वभाव उसके मूल पाप के रूप में आया जब उसने जन्म लिया। जब तक कि वह दूसरे बच्चों को मारने के इस दुष्ट व्यवहार को विकसित कर चुका है, फिर भी, दुष्टता को अपनाने की एक प्रक्रिया रही है। सबसे पहले उसने दूसरे लोगों को एक दूसरे को मारते देखा फिर उसने स्वयं इसे एक दो बार दोहराया, और अब उसकी दूसरे लोगों को मारने की आदत बन गर्इ है।

आदम अपनी स्वतंन्त्र इच्छा द्वारा सर्प के प्रलोभन में पड़कर भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाया जबकि परमेश्वर ने उसे चेतावनी दी थी, तू निश्चय ही मर जाएगा’’, ‘आत्मा’ – जो मनुष्य का स्वीमा है – मर गया। तब से आदम का परमेश्वर के साथ विचार एवं भावनओं आदान प्रदान टूट गया। तब से आदम और उसके वंशज दुष्ट शत्रु और शैतान के दास बन गए।

जैसा कि हम रोमियों 6:16 में पाते है ‘‘क्या तुम नहीं जानते कि किसी की आज्ञा मानने के लिए तुम अपने आप को दासों के समान सौंप देते हो, तो जिसकी आज्ञा मानते हो उसी के दास बन जाते हो चाहे पाप के जिसका परिणाम मृत्यु है, चाहे आज्ञाकारिता के जिसका परिणाम धार्मिकता है? पाप की आज्ञा मानने के कारण आदम दुष्ट शत्रु का दास बन गया जो अंधकार का प्रमुख अधिकारी है।’’

उस समय आदम को वह सारी महिमा और अधिकार को त्यागना पडा़ जो उसे उप्तत्ति (1:28) में सभी वस्तुओं पर दी गर्इ थी, और उसने वह सब दुष्ट शत्रु को दे दी, जिसने लूका (4:6) में यीशु से कहा, ‘‘यह सारा अधिकार और इसका वैभव मैं तुझे दे दूंगा, क्योंकि यह मुझे दिया गया है और मैं, जिसे चाहता हूं उसे देता हूं’’।

तभी से जब से दुष्ट शत्रु ने आदम से सृष्टि की सभी वस्तुओं और जीव जन्तुओं पर अधिकार प्राप्त किया है वह संसार में दुष्टता और पाप को बढ़ाकर खराब कर रहा है और समय बीतने के साथ-साथ मनुष्य के हृदय में और अधिक दुष्टता बढ़ गर्इ है। इसके साथ ही दुष्ट शत्रु लोगों में बीमारियां, गरीबी, बरबादी, आंसु, दु:ख जिसका अन्त नरक में जाकर होता है जो हमेशा के लिए अनन्त मृत्यु का स्थान है।

फिर भी मनुष्य के रचयिता परमेश्वर ने यह योजना बनार्इ की मनुष्य नरक में न जाएं, परन्तु इस संसार का अनुभव के साथ साथ और सही ढंग से बढ़ने के बाद अन्त में वह हमेशा के लिए स्वर्ग में प्रवेश करें।   

इसीलिए क्योंकि परमेश्वर पहले से ही जानता था कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खाएगा उसी क्षण उसने मनुष्य के लिए एक योजना और पापमय मनुष्य जाति के लिए एक उद्वार का मार्ग तैयार किया और वह मार्ग प्रभु यीशु मसीह है।   

  1. मानवजाति के लिए उद्धार का मार्ग भूमि के छुटकारे के नियम के अनुसार।

फिर किस प्रकार से पापी मनुष्य उद्धार को प्राप्त कर सकते हैं? परमेश्वर प्रत्येक वस्तु को अपने न्याय और प्रेम में चलाता है। यहां तक कि उसने प्रत्येक वस्तु को एक सीमा रेखा और आत्मिक नियम और क्रम में रखा है, पापियों के लिए उसकी क्षमा और उद्वार भी इस सिद्ध न्याय के अन्दर है। इसीलिए पापी मनुष्य जाति के उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह ने क्रूस की मृत्यु सहकर हमें हमारे पापों से छुटकारा दिया। आत्मिक नियम के अनुसार ‘‘पाप की मजदूरी मृत्यु है’’ प्रभु यीशु मसीह ने हमारे पापों के लिए अपनी जान क्रूस पर देकर हमारी कीमत चुकार्इ और हमें छुटकारा दिया।

जो कोर्इ भी यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करता है तो वह उद्धार को प्राप्त करने और स्वर्ग में प्रवेश करने के योग्य है। इसलिए मनुष्य को प्रभु यीशु मसीह के लहू के कामों पर विश्वास करना होगा, प्रभु को ग्रहण करना होगा और प्रभु की संतान बनना होगा तब वह आशिष भरा जीवन पाएगा और दुष्ट शैतान उस पर कोर्इ अधिकार नहीं रख सकेगा।

वे लोग जो इस सच्चार्इ पर विश्वास नहीं करते, हमेशा पूछते हैं ‘‘हम केवल तभी क्यों उद्धार पाएंगे जब केवल यीशु मसीह पर विश्वास करेंगे? जबकि बार्इबल प्रेरितों के काम 4:12 में बताती है ‘‘किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में कोर्इ दूसरा नाम नहीं दिया गया है। जिसके द्वारा हम उद्धार पाएं।’’ यीशु के अलावा कोर्इ भी उद्धारकर्ता नहीं हो सकता और न ही उसे उद्धारकर्ता ग्रहण किए बिना कोर्इ उद्धार प्राप्त कर सकता है।

क्यों केवल यीशु ही हमारा उद्धारकर्ता हो सकता है?यह क्योंकि एक आत्मिक सिद्धांत है और आत्मिक सिद्धांत के अनुसार आदम के पाप के कारण प्रत्येक मनुष्य का मृत्यु निर्धारित है और ‘‘पाप की मजदूरी मृत्यु है’’ जब सब मनुष्य आत्मिक सिद्धांत के अनुसार दुष्ट शत्रु (डेविल) के दास बन गए तो उन पर यह बात लागू हो गर्इ ‘‘जब आप किसी की आज्ञा मानने के लिए, अपने आप को दासों के समान सौंप देते हो तो जिसकी आज्ञा मानते हो उसी के दास बन जाते हो।’’

किस आत्मिक सिद्धांत के अनुसार पापी मानवजाति क्षमा और उद्वार प्राप्त कर सकती है? इस प्रश्न का उत्तर हम ‘भूमि के छुटकारे के नियम के अनुसार’ जो बाइबल में अंकित है, से प्राप्त कर सकते हैं।

लैव्यव्यवस्था 25:23-25 में लिखा है, ‘‘भूमि को सदा के लिए न बेचा जाए, क्योंकि भूमि मेरी है और तुम मेरे साथ केवल परदेशी और प्रवासी हो। इस प्रकार तुम्हारे उत्तराधिकार के सारे देश में मूल्य चुकाकर भूमि को छुडा लेने का प्रबन्ध करना। और यदि तुम्हारा भार्इ ऐसा दरिद्र हो जाए कि उसे अपनी निजी भूमि में से कुछ बेचना पड़े तो उसका जो सब से निकट कुटुम्बी हो, वह आकर उस भूमि को जिसे उसके भार्इ ने बेच डाला है, छुडा लें।

इस प्रकार के नियम की स्थापना इस्त्राएल में भूमि के छुटकारे के लिए बनाया गया और यह बात मनुष्य पर भी लागू होती है जो कि मिट्टी से बनाया गया है।

परमेश्वर ने कनान की भूमि को विभाजित करके उसे इस्त्राएल के प्रत्येक कबिले और घरानों के अनुसार बाँट दिया और तब से ही सारी भूमि मूल रूप से परमेश्वर की हो गर्इ और मनुष्य इसे अपनी इच्छा से नहीं बेच सकता है।

यदि भूमि का मालिक गरीब हो जाए और उस पर भूमि को बेचने का दबाव डाला जाए तो उसका निकट कुटुम्बी उसे खरीद कर उसे वापस उसके मालिक को लौटा दे। यदि इस भूमि के इस छुटकारे के नियम को पापी मनुष्य जाति के छुटकारे के मार्ग के साथ जोड़ देते हैं तो ऐसा इसलिए क्योंकि भूमि के खरीदने और बेचने का नियम सीधे मनुष्य से सम्बन्ध रखता है जो कि खुद भूमि की मिटटी से बनाया गया है।

उत्पत्ति 3:19 में परमेश्वर ने आदम से कहा ‘‘तू अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिटटी में मिल जाएगा, क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है। तू मिटटी तो है, अत: मिटटी में फिर मिल जाएगा।’’ और उत्पत्ति 3:23 में लिखा है ‘‘इसलिए यहोवा परमेश्वर ने उसे अदन की वाटिका से बाहर निकाल दिया कि उसी भूमि पर खेती करे जिसमें से वह बनाया गया था।

भूमि के छुटकारे के नियम अनुसार भूमि का मनुष्य के साथ सीधा सम्बन्ध है जो भूमि से लिया गया और शैतान दुष्ट के हाथों बेचा गया जो फिर परमेश्वर के हाथों में चला जाए। जिस तरह से जमीन परमेश्वर की है जिसने आदम के अधिकार को अनुबंध किया जिसमे मूलतत्व उसका है उसे पूर्ण रूप हमेशा के लिए बेचा न जाए।

यह नियम आदम के समय में परमेश्वर और दुष्ट शत्रु दोनों के बीच मे तय हुआ, आदम जिसने परमेश्वर की दृष्टि में पाप किया और दुष्ट शत्रु के पास चला गया। इस प्रकार यदि आदम दुष्ट शत्रु का दास बन गया और उस पर अपने सारे अधिकार को छोड़ने का दबाव डाला गया तब यदि कोर्इ व्यक्ति, व्यक्तिगत रूप से सामने आए और भूमि के छुटकारे के नियम को पूरा करे तो दुष्ट शत्रु को वह सब वापस लौटाना पड़ेगा जो उसके हाथ में सौपा’’ गया था।

जैसे कि परमेश्वर पहले से ही जानता था कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खा लेगा। उसने एक उद्धारकर्ता को तैयार किया जो कि भूमि के छुटकारे के नियम की सभी बातों को पूरा करे और वह उद्धारकर्ता यीशु मसीह है। वे कौन सी विशेषताएं है जिसे उद्धारकर्ता को पूरा करना है?मैं इसे मानमिन समाचार के अगले अंक में ज़ारी रखुंगा।

प्रभु यीशु समीह में प्यारे भाइयों और बहनों।

आप में से प्रत्येक परमेश्वर को महीमा और धन्यवाद दे कि उसने एक पापी मानवजाति के उद्धार का मार्ग खोला उस नियम के अनुसार जो भूमि के छुटकारे का है और प्रभु यीशु मसीह में एक बड़ा विश्वास रखकर सामथ्र्ाी जीवन व्यतीत करें। प्रभु यीशु मसीह के नाम में प्रार्थना करता हूं। आमीन

 

 

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