‘‘क्रूस का संदेश-8’’

क्यों यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है?

उद्धारकर्ता होने के लिए विशेषताएं – 1

‘‘फिर भी हम समझदारों में ज्ञान की बाते सुनाते हैं, परन्तु यह ज्ञान न तो इस युग का और न ही उसके शासकों का है जो मिटने वाले हैं। परन्तु हम परमेश्वर के उस ज्ञान के रहस्य का वर्णन करते हैं अर्थात उस गुप्त ज्ञान का जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया।’’ (1 कुरिन्थियों 2:6-7)

जब अविश्वासियों को जो परमेश्वर को नहीं जानते यह बताया जाता है कि केवल यीशु मसीह ही उद्धारकर्ता है और हम किसी दूसरे के द्वारा नहीं बचाए जा सकते तो वह या तो समझ नहीं पाते और या वे मसीहत को स्वयं धार्मिकता की संज्ञा दे देते हैं। इसलिए हमारे लिए स्पष्ट रूप से यह समझना आवश्यक है कि क्यों केवल यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है और इस सुसमाचार को लोगों तक पहुंचाने के लिए हमे हर संभव प्रयन्त करना चाहिए।

प्रकाशन का क्रम

क्यों यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है?

  1. मनुष्यजाति के लिए उद्धार का मार्ग, भूमि के छुटकारे के नियम के अनुसार।
  2. उद्धारकर्ता होने के लिए विशेषताएं।
  3. उद्धारकर्ता होने के लिए विशेषताएं।

जैसे कि परमेश्वर पहले से ही जानता था, कि आदम भले और बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल खा लेगा, इसीलिए उसने मानवजाति के लिए उद्वारकर्ता को तैयार किया।

जो भूमि के छुटकारे से सम्बन्धित सभी शर्तो को पूरा करेगा। और वह उद्धारकर्ता यीशु मसीह है। मैं आपको स्पष्ट करूंगा कि क्यों केवल यीशु मसीह चार आधार भूत शर्तों के कारण मानवजाति के उद्धारकर्ता है।

  1. यीशु मसीह ने पहली शर्त को पूरा किया, ‘‘उद्धारकर्ता का मनुष्यरूप होना बहुत जरूरी है।’’

लैव्यव्यवस्था 25:25 ‘‘भूमि छुड़ाने की विधि’’ में इस प्रकार लिखा है ‘‘और यदि तुम्हारा भार्इ ऐसा दरिद्र हो जाए कि उसे अपनी निज भूमि में से कुछ बेचना पड़े तो उसका जो सब से निकट कुटुम्बी हो वह आकर उस भूमि को जिसे उसके भार्इ ने बेच डाला है छुड़ा ले।

जिस प्रकार से निकट कुटुम्बी अपने भार्इ की बेची हुर्इ जमीन को वापस खरीदता है उसी प्रकार से आदम के वंशजों को जो शैतान के हाथ में चले गए थे जरूरी था कि उन्हें आदम को कोर्इ निकट कुटुम्बी वापस खरीदे।

तब आदम का निकट कुटुम्बी कौन है? यह दर्शाता है उस मनुष्य के बारे मे जो आदम की तरह हो और जिसके पास आत्मा प्राण और शरीर हो, यह हमें 4 कुरिन्थियों 15:21-22 की याद दिलाता है ‘‘क्योंकि जब एक मनुष्य के द्वारा मृत्यु आर्इ तो एक ही मनुष्य के द्वारा मृतकों का पुनरूत्थान भी आया। जिस प्रकार आदम में सब मरते हैं उसी प्रकार मसीह में सब जिलाए जाएंगे।’’

पहली शर्त जो मनुष्यजाति को उनके पापों से बचाने वाले उद्वारकर्ता मे होनी जरूरी है वह उसका मनुष्य रूप है। यीशु मसीह रचियता परमेश्ववर का पुत्र है परमेश्वर के पास स्वयं अपनी विशेषताएं सामर्थ्य, अधिकार और प्रभुत्व की महिमा है। तब वह कैसे मनुष्य का निकट कुटुम्बी हो सकता है।

यूहन्ना 1:14 यीशु मसीह के बारे में बताता है ‘‘और वचन, जो अनुग्रह और सच्चार्इ से परिपूर्ण था, देहधारी हुआ, और हमारे बीच में निवास किया। और यूहन्ना 1:1 में लिखा है ‘‘वचन परमेश्वर था’’, ‘‘वचन देहधारी हुआ’’ हमें दर्शाता है कि परमेश्वर हड्डी और मांस का मनुष्य बनकर इस दुनिया में आया।

प्रभु यीशु मसीह ने मानवजाति को उनके पापों से बचाने के लिए मनुष्यरूप में जन्म लिया। क्योंकि वह मनुष्य था इसलिए यीशु मसीह थकावट, भूख, प्यास, आनन्द और दु:ख महसूस करता था। इसी कारण जब उसे क्रूस पर लटकाया गया था तो उसका लहू बहा और उसने अत्यधिक दर्द को महसूस किया था।

यहां पर एक भी सबूत ऐसा नहीं है जो इस बात से इंकार करे की यीशु मसीह मनुष्य था। हम जानते हैं कि मानवजाति का इतिहास दो भागों में बांटा हुआ है बीसी (BC) वह समय जो यीशु मसीह के जन्म से पूर्व का है और एडी (AD) वह समय जो यीशु मसीह के जन्म के बाद का है। लैटिन भाषा में एडी का अर्थ प्रभु के वर्ष में है। दूसरे शब्दों में वह तरीका जिससे हमें इतिहास की गणना करते हैं वह इतिहास इस सच्चार्इ को बताता है कि यीशु मसीह इस संसार में मनुष्य रूप में आया था।

  1. यीशु मसीह ने दूसरी शर्त को पूरा किया ‘‘उद्धारकर्ता आदम का वंशज नहीं होना चाहिए?

क्यों आदम का वंशज उद्धारकर्ता नहीं हो सकता?

जब परमेश्वर ने मनुष्य को रचा तो उसने आदम और हव्वा को जीवन का बीज दिया। पुरूष को शुक्राणु और तथा स्त्री को अंडे दिये ताकि इनके द्वारा वह एक नए जीवन को जन्म दे सकें। इस शुक्राणु और अण्डे की वजह से कर्इ वंशानुगत प्रभाव और व्यक्तिगत विशेषताएं बच्चे में जैसा माता पिता का, स्वभाव, व्यक्तिगत चरित्र, बाहरीरूप और यहां तक की आदतें भी आ जाती हैं। यही कारण है कि बच्चे शारीरिक रूप से, स्वभाव से, और आदतों से अपने माता पिता की तरह दिखते हैं।

आदम के पाप करने के बाद मनुष्य के पूर्वजों का पापमय स्वभाव और आदतें उसके वंशजों में आ गर्इ और यह ‘‘मूल पाप’’ था। इस प्रकार से हरेक व्यक्ति उसी क्षण पापी बन जाता है जिस क्षण उसका जन्म होता है। क्योंकि उसे वंशानुगत रूप से पापी स्वभाव आदम और अपने पूर्वजों से प्राप्त होता है।

इसके बारे में रोमियों 5:12 हमें बताता है कि ‘‘अत: जिस प्रकार एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया, तथा पाप के द्वारा मृत्यु आर्इ, उसी प्रकार मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गर्इ, क्योंकि सब ने पाप किया।’’ जिस प्रकार से एक आदम के पाप करने के कारण सारी मानवजाति पर मृत्यु आ गर्इ उसी प्रकार से उसके सारे वंशज उसके पाप के कारण पाप के प्रभाव से पापी हैं।

यदि एक मनुष्य स्वयं पापी है तो वह दूसरे मनुष्य को उसके पाप से नहीं छुड़ा सकता। उदाहरण के लिए कल्पना कीजिए की यदि आपके भार्इ के ऊपर एक बड़ा कर्ज है और वह अपने आप को एक कैद में महसूस कर रहा है और यदि आपके ऊपर स्वयं बड़ा कर्ज है और आप भी स्वयं को एक कैद में महसूस कर रहे हैं तो आप इस योग्य नहीं है कि अपने भार्इ की मदद करें और उसके कर्ज को चुका पाए।

इसी प्रकार से उद्धारकर्ता जो कि मानवजाति को उनके पापों से छुटकारा दिलाएगा वह मनुष्य होना चाहिए, परन्तु जरूरी है कि वह पापी न हो। क्योंकि आदम के मूल पाप के कारण उसके सारे वंशजों ने पाप में जन्म लिया, इसलिए वे दूसरे को उनके पापों से छुटकारा नहीं दिला सकते। दूसरे शब्दों में कोर्इ भी क्रान्ति जो इस पृथ्वी पर जन्मा है उद्धारकर्ता होने की दूसरी शर्त को पूरा नहीं करता।

तब फिर वह कौन है जो उद्धारकर्ता होने की दूसरी शर्त को पूरी करता है कि वह मनुष्य हो परन्तु पापी न हो। उन सभी मनुष्यों में से जिन्होंने पृथ्वी पर जन्म लिया केवल यीशु ही जो कि परमेश्वर का एकलौता पुत्र है मनुष्य है परन्तु आदम का वंशज नहीं है और न ही ‘‘पापी’’ है।

शारीरिक रूप से यीशु मसीह दाऊद का वंशज और यूसूफ और मरियम का पुत्र है। परन्तु मत्ती 1:20 हमें याद दिलाती है कि यीशु मसीह, उसका गर्भ पवित्रआत्मा की और से है’’ और मत्ती 1:22 हमें यीशु के जन्म के भविष्यवाणि के बारे में बताती है। ‘‘देखो एक कुवाँरी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा।’’

यीशु मसीह युसुफ के शुक्राणु और मरियम के अण्डे द्वारा गर्भ में नहीं आया परन्तु वह पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आया। यीशु मसीह आदम का वंशज नहीं है और क्योंकि उसे वंशानुगत रूप से कोर्इ प्रभाव और विशेषताएं नहीं मिला है इसलिए उसका जन्म मूल पाप के साथ नहीं हुआ था।

इस बात को ध्यान में रखिए की जब कुवाँरी मरियम ने यीशु मसीह को गर्भ में रखा और उसे जन्म दिया तब भी वह उसकी ‘माँ’ नहीं हो सकती यहां तक की यदि एक अण्डे (भ्रृण) को एक मशीन में रख दिया जाए और विकसित विज्ञान की मदद के द्वारा 9 महीने बाद एक बच्चे को जन्म दिया जाए तब भी उस मशीन को उस बच्चे की ‘माँ’ नहीं कहा जा सकता। यीशु मसीह और कुवाँरी मरियम का सम्बन्ध ऐसा ही है। इसी कारण से यीशु मसीह ने बार्इबल में कभी मरियम को ‘माँ’ नहीं कहा।

परन्तु ‘‘औरत’’ शब्द का प्रयोग किया (यूहन्ना 2:4, 19:26) यीशु मसीह की माँ के रूप में मरियम को केवल यीशु मसीह के चेलों ने अभिव्यक्त किया है और हमें उसकी आराधना नहीं करनी चाहिए। हमेशा याद रखिए की हमें केवल त्रिएक परमेश्वर की आराधना और उससे ही प्रार्थना करनी चाहिए।

मैं इस संदेश को मानमिन समाचार श्रृंखला में जारी रखूंगा।

प्रभु यीशु मसीह में प्यारे भाइयों और बहनों

मैं प्रभु यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना करता हूं कि जैसे आपको समझ और ज्ञान प्राप्त हुआ है इस सच्चार्इ का कि यीशु मसीह को छोड़कर कोर्इ भी इस पृथ्वी पर इस योग्य नहीं है कि वह मानवजाति के उद्धार की विशेषताओं को पूरा करे। हो सके कि आप में से प्रत्येक जल्दी से विश्वास द्वारा यीशु मसीह को उद्धारकर्ता ग्रहण करे और परमेश्वर के एक बच्चे की तरह सारी आशिषों और अधिकार का आनन्द लें। आमिन

 

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