‘‘क्रूस का संदेश-9’’

क्यों यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है?

उद्धारकर्ता होने के लिए विशेषताएं – 2
फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होनेवाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया।(1 कुरिन्थियों 2:6-7)
जब मसीही लोग उन लोगों को जो परमेश्वर के प्रेम को नहीं जानते यह बताते है कि केवल यीशु मसीह ही उद्धारकर्ता है और हम किसी दूसरे के द्वारा नहीं बचाए जा सकते, तो या तो वह समझ नहीं पाते या वे मसीहत को स्वयं धार्मिकता की संज्ञा दे देते हैं’’।
जब लोग खुलकर उद्धारकर्ता होने की विशेषताओं पर बातचीत करते हैं तो वे यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं जो क्रूस पर मरा और दुबारा जीवित हुआ और उसके द्वारा उद्धारकर्ता को प्राप्त करते हैं। इसके आगे वे पवित्र आत्मा और परमेश्वर के सामथ्र्य को भी प्राप्त करते हैं तथा फिर प्रभु के गवाह बनकर असंख्य लोगों को उद्धार के मार्ग पर लाने में उनकी अगुवार्इ करते हैं।

मानमिन समाचार के पिछले अंक में मैंने बताया था कि भूमि के छुटकारे के नियम के अनुसार (लैव्यव्यवस्था 25:25) मनुष्य के उद्धारकर्ता को पहले आदम का निकट कुटुम्बी होना आवश्यक है दूसरा वह आदम का वंशज नहीं होना चाहिए। आज हम उद्धारकर्ता होने की तीसरी और चौथी विशेषताओं को देखेंगे।
1. यीशु मसीह ने तीसरी विशेषता को पूरा किया ‘‘उद्वारकर्ता के पास दुष्ट शत्रु को हराने की ताकत होनी चाहिए।
जिस प्रकार से युद्ध के मैदान से सैनिकों को बचाने के लिए शत्रु को हराने की ताकत होनी चाहिए उसी प्रकार से मनुष्यजाति को जो कि दुष्ट शत्रु के दास बन चुके हैं आत्मिक सामथ्र्य की जरूरत है जो शत्रु पर अधिकार ले सके। आत्मिक क्षेत्र में पाप रहित होने पर सामथ्र्य आती है जैसे कि अंधेरा ज्योति से भागता है। उसी प्रकार से जब लोग बिना पाप के पूरी तरह से ज्योति में बढ़ते हैं तो वे दुष्ट शत्रु के ऊपर जिसका सम्बन्ध अंधकार से है विजयी होते हैं।
पाप दो प्रकार के होते हैं मूल पाप और स्वयं किया गया पाप ‘‘मूल पाप’’ उस पापमय स्वभाव को दर्शाता है जो हमें आदम से मिला है और ‘‘स्वयं किया गया पाप’’ वह है जो लोग अपने इस पृथ्वी पर जीवन व्यतीत करने के दौरान करते हैं। इस संसार के लोग इस बात का निर्धारण इस प्रकार करते हैं कि यह बात कोर्इ विशेष नहीं है कि मनुष्य का हृदय कितना बुरा है जब तक कि यह बुरा हृदय कोर्इ बुरा कार्य नहीं करता वह मनुष्य पापी नहीं है। आत्मिक क्षेत्र में वह मनुष्य पहले से ही पापी ठहर जाता है जिसके हृदय में पाप है। (1 यूहन्ना 3:15, मत्त 5:28)
व्यक्तिगत रूप से कोर्इ भी जिसने पाप को कार्य रूप दिया हो या जिसके हृदय में पाप हो उसके पास यह सामथ्र्य नहीं है कि वह मनुष्य जाति को बचा सके एक ओर सभी मनुष्य जिनका जन्म आदम के बाद हुआ उनमें मूल पाप था और उन्होंने अपने जीवन के दौरान पाप भी किया। जबकि दूसरी ओर हमारा प्रभु यीशु मसीह पवित्र आत्मा द्वारा गर्भ में आया और वह आदम का वंशज नहीं था।
इस प्रकार से यीशु मसीह को मूल पाप विरासत में नहीं मिला। और उसने जन्म से ही परमेश्वर के वचन की आज्ञा का पालन किया और अपने पृथ्वी पर जीवन बिताने के दौरान कोर्इ भी पाप नहीं किया (इब्रानियों 7:27, 1 पतरस 2:22)।
इसलिए यीशु मसीह के पास यह सामथ्र्य है कि वह मनुष्य जाति को दुष्ट शत्रु से बचाए और वह श्राप के इस नियम को कि ‘‘पाप को मज़दूरी तो मृत्यु है’’ (रोमियों 6:23) से बंधा हुआ नहीं है। क्योंकि वह पापरहित था इसलिए वह अपने आत्मिक अधिकार के साथ सब पापियों को बचा सकता है यहां तक की वह सृष्टि की सभी वस्तुओं पर अधिकार रखता है और यीशु मसीह के आगे न केवल दुष्ट शत्रु और शैतान झुकते हैं परन्तु सभी प्रकार की बीमारियां और कमजोरियां भी घुटने टेकती हैं। आत्मिक क्षेत्र का यह नियम न केवल यीशु मसीह पर परन्तु परमेश्वर की हरेक संतान पर जो यीशु मसीह पर विश्वास करता है लागू होता है। जो कोर्इ भी परमेश्वर से प्रेम करता है और उसके वचन के अनुसार चलता है तो परमेश्वर के सामथ्र्य द्वारा जब वह दुष्ट शत्रु और शैतान को यीशु मसीह के नाम से निकालता है तो उन्हें उसके सामने से भागना पड़ता है।
मैंने ऐसी बातों को कर्इ बार अनुभव किया है। जब में परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता था तो मुझे हमेशा दवाइयों और अस्पताल जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। क्योंकि मैं सात वर्षों से कर्इ बीमारियों से पीड़ित था। परन्तु प्रभु को ग्रहण करने के बाद मैं वचन के अनुसार चलने लगा तो मेरा पूरा परिवार बिना अस्पताल जाए पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ्य रहने लगा। मैं यीशु मसीह के नाम से प्रार्थना करता और आज्ञा देता था तो लोग जो की बहुत सी बीमारियों जैसे कैंसर, ल्यूकमियां, एड्स, और अन्य कर्इ असाध्य बीमारियों से पीड़ित होते हैं चंगे हो जाते हैं। बहुत से अंधे गूंगे बहरे ठीक हो जाते और दुष्ट आत्माए निकल जाती थी।
मानवजाति के इतिहास में यीशु मसीह को छोड़कर कोर्इ दूसरा मनुष्य नहीं है जो उद्धारकर्ता होने की विशेषताओं को पूरा करे। और सभी महान व्यक्ति जैसे बुद्ध, कन्फयूशियस, और सुकरात आदम के वंशज होने के कारण सभी मूल पाप में उत्पन्न हुए थे और परमेश्वर की दृष्टि से इन्होनें पवित्र जीवन नहीं बिताया था। केवल यीशु मसीह ही उद्धारकर्ता की विशेषताओं को पूरी करता है।
2. यीशु मसीह ने चौथी विशेषता को भी पूरा किया। उद्धारकर्ता को एक ऐसे प्रेम से भरा हुआ होना चाहिए जिसके द्वारा वह अपने को कुर्बान कर दें।
यदि एक भार्इ को कानून द्वारा अपना कर्जा न चुकाने के कारण सजा मिलती है तो वह अपनी आज्ञा से बच सकता है यदि उसकी अमीर बहन उसकी जगह उसका कर्जा चुका दे। उसकी बहन की सारी सम्पत्ति कोर्इ अर्थ नहीं रखती यदि वह अपने भार्इ से प्यार न करती हो उसकी बहन तभी उसका कर्जा चुकाएगी जब वह अपने भार्इ को इतना प्यार करती हो कि इस कर्ज को चुकाने में चाहे उसे अपना नुकसान भी उठाना पड़ जाए।
भूमि छुड़ाने के नियम के अनुसार भूमि केवल तभी छुडार्इ जा सकता जब उस मनुष्य का निकट कुटुम्बी जिसने भूमि बेची थी अपने प्रेम के कारण उसकी मदद करना चाहता है। यही बात मनुष्य जाति से उसके पापों के छुटकारे के लिए भी लागू होती है। यहां तक की प्रभु यीशु मसीह उद्धारकर्ता होने की पहली तीन शतोर्ं को पूरा करता है परन्तु फिर भी बिना प्रेम के वह पापियों को उनके पाप से छुटकारा नहीं दिला सकता।
मनुष्यजाति का उद्धारकर्ता बनने के लिए यह जरूरी था कि वह सारे पापियों के लिए एक सताव और पीड़ा से गुजरे और जिसकी सजा मृत्यु के रूप में जानी जाए। इस बात के लिए यीशु मसीह के साथ एक बहुत बुरे और खराब अपराधी की भांति व्यवहार किया गया और उसने एक तिरस्कार पूर्ण मृत्यु को क्रूस पर ले लिया और अपना सारा लहू बहा दिया यद्यपि बहुत से अन्य तरीके हैं जिनके द्वारा अपराधी को कानूनन मृत्यु दण्ड दिया जाता है, परन्तु आत्मिक नियम के अनुसार उद्धारकर्ता को जो कि पापियों को उनके पापों से बचाएगा उसे साधारण मृत्यु से नहीं मरना परन्तु क्रूस पर लटकना और मृत्यु तक अपने लहू को बहाना जरूरी था।
गलतियों 3:13 हमें बताती है कि ‘‘मसीह ने व्यवस्था के शाप से हमें मुल्य चुका कर छुड़ाया और स्वयं हमारे लिए शापित बना, क्योंकि लिखा है, ‘‘जो कोर्इ काठ पर लटकाया जाता है वह शापित है। यहां पर ‘‘श्राप का नियम’’ आत्मिक नियम को दर्शाता है जो कि रोमियों 6:23 में हैं ‘‘पाप की मज़दूरी तो मृत्यु है’’ ‘‘मृत्यु श्राप का नियम है’’ जो कि पापों के ऊपर आत्मिक नियम के अनुसार आता है। एक तरीका जिसके द्वारा उद्धारकर्ता मानवजाति उनके पापों से छुटकारा दिला सकता था वह यही था। इसका अर्थ यह हुआ कि उद्धारकर्ता को श्रापित पापियों के बदले काठ पर लटकना जरूरी था।
यही बात की मृत्यु में उद्धारकर्ता का लहू बहना चाहिए पर भी लागू होती है लैव्यव्यवस्था 17:14 में लिखा है ‘‘क्योंकि शरीर का प्राण तो लहू में है’’ जबकि इब्रानियों 9:22 हमें याद दिलाती है ‘‘व्यवस्था के अनुसार प्राय: सब वस्तुएं लहू के द्वारा शुद्ध की जाती है, और लहू बहाए बिना क्षमा है ही नहीं’’।
लहू आत्मिक रूप से एक तरह से ‘जीवन’ है। इसलिए जरूरी था कि पापियों की क्षमा और जीवन के लिए उद्वारकर्ता का लहू बहाया जाए।
मनुष्य अपने पापों से किसी भी व्यक्ति को काठ पर लटकाए जाने के द्वारा छुटकारा नहीं पा सकता परन्तु केवल उसी लहु द्वारा जो साफ, शुद्ध और पापी लक्षणों से रहित हो आप क्या सोचते है कि, क्यों एक पाप रहित व्यक्ति इस प्रकार की मृत्यु को दूसरों के पाप के बदले लेना पसंद करेगा। इस प्रकार का बलिदान केवल तभी दिया जा सकता है जब वह व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने जीवन से भी अधिक प्रेम करता हो। यही बात है कि मनुष्यजाति को इस प्रकार का प्रेम दिखाने के कारण यीशु मसीह हमारा उद्धारकर्ता बना। (रोमियों 5:7-8)
प्रभु यीशु मसीह में प्यारे भाइयों और बहनों,
मैं प्रभु यीशु मसीह के नाम हमारे पर
हमारे परमेश्वर का प्रेम एक न बदलने वाला प्रेम है। अपने इसी प्रेम के कारण परमेश्वर ने अपना एकलौता बेटा यहां तक कि एक आज्ञा न मानने वाले पापियों के लिए दे दिया। यह एक सच्चा प्रेम है जिसके द्वारा यीशु मसीह ने अपना जीवन बलिदान कर दिया ओर विनती की ‘‘पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि यह नहीं जानते कि यह क्या कर रहे हैं’’ उन दुष्ट पापियों के लिए जो उद्वारकर्ता का मजा़क और उसे क्रूस पर चढ़ा रहे थे।
मानमिन समाचार के पिछले अंक में हमने उन चार शतोर्ं को जाना जो मानवजाति के छुटकारा दिलाने वाले में होनी चाहिए। आप में से उन साधारण रूप से प्रत्येक यह जान गया होगा कि केवल यीशु मसीह ही हमारा उद्धारकर्ता है। यीशु मसीह को ग्रहण करो और न केवल उद्धार पाओ परन्तु सच्चे विश्वास को भी पाओ और बहुत से लोगों को उद्धार के मार्ग पर लाओ। ऐसा मैं प्रभु यीशु मसीह के नाम में मांगता हूं।

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